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सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह पर विदेशी चंदा लेने का आरोप, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

इंदिरा के समर्थन वाले एनजीओ लॉयर क्लेक्टिव ने कहा है कि 'उन्हें जबरन परेशान करने के लिए यह याचिकाएं दायर की गई हैं। क्योंकि उन्होंने चीफ जस्टिस रंजन गोगई के खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला के वकील के तौर पर प्रतिनिधित्व किया है।

सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह। (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह पर विदेशी चंदा लेने के मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर केंद्र से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप है कि इंदिरा ने यूपीए सरकार के दौरान 2009 से 2014 एडिशनल सॉलिसीटर जनरल के पद पर रहते हुए विदेशी चंदा हासिल किया था।

इस पर इंदिरा के समर्थन वाले एनजीओ लॉयर क्लेक्टिव ने कहा है कि ‘उन्हें जबरन परेशान करने के लिए यह याचिकाएं दायर की गई हैं। क्योंकि उन्होंने चीफ जस्टिस रंजन गोगई के खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला के वकील के तौर पर प्रतिनिधित्व किया है।

वहीं एनजीओ लॉयर वॉइस की तरफ से सीनियर एडवोकेट पुरुषेंद्र कौरव ने गृह मंत्रालय के 31 मई 2016 और 27 नवंबर 2016 के आदेशों का हवाला देते हुए कहा ‘जयसिंह और आनंद ग्रोवर (एनजीओ लॉयर क्लेक्टिव के सेक्रेटरी और प्रेसिडेंट) ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआए) का उल्लंघन किया है। इसके साथ ही प्राप्त राशि का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों के लिए भी किया।’

याचिका में आरोप लगाया गया है कि इंदिरा, ग्रोवर और लॉयर्स कलेक्विटव ने एफसीआरए, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) तथा भ्रष्टाचार रोकथाम कानून का उल्लंघन किया। यही नहीं जानकारी होने के बावजूद सरकार ने उनके खिलाफ किसी तरह की जांच नहीं बैठाई।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गृह मंत्रालय को भी नोटिस जारी किया और जवाब देने को कहा। एनजीओ लॉयर क्लेक्टिव का लाइसेंस सरकार ने 2016 में ही सस्पेंड कर दिया था और उसके बाद विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के तहत बाद में रद्द भी कर दिया था।

 

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