क्या सच में कोरोना टीका के लिए बिना आधार कोविन रजिस्ट्रेशन नहीं होगा? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत से कहा कि रजिस्ट्रेशन के लिए CoWIN ऐप पर सात डॉक्यूमेंट सूचीबद्ध हैं। लेकिन जब आप टीकाकरण केंद्र जाते हैं तो वहां आधार पर जोर दिया जाता है और इसके बिना टीकाकरण की अनुमति नहीं दी जाती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कोविन पोर्टल पर कोरोना टीका के रजिस्ट्रेशन के लिए आधार कार्ड पर जोर देने को लेकर जवाब मांगा है। (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है और पूछा है कि क्या सच में कोरोना टीका के लिए बिना आधार कार्ड के कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं होगा? 

केंद्र सरकार को यह नोटिस जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और बीवी नागरत्न की पीठ ने जारी किया है। दरअसल यह नोटिस पुणे के वकील सिद्धार्थ शंकर शर्मा द्वारा दायर की गई एक याचिका पर जारी किया गया है जिसमें उन्होंने दावा किया था कि कोविन पोर्टल पर कोरोना टीका के रजिस्ट्रेशन के लिए दिए गए सात पहचान पत्रों में से आधार पहचान पत्र पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। 

हालांकि शुरुआत में पीठ इस याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं था। शुरू में दो जजों की बेंच का नेतृत्व कर रहे जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने याचिकाकर्ता सिद्धार्थशंकर शर्मा से कहा था कि अगर वह CoWin ऐप चेक करते हैं तो वह देखेंगे कि पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे अन्य पहचान प्रमाणों को भी अनुमति दी गई है। 

जस्टिस चंद्रचूड़ ने याचिकाकर्ता से यह भी कहा कि आप अखबार के लेखों पर मत जाइए। क्या आपने हाल ही में CoWin एप्लिकेशन को स्वयं देखा है? इसे अब अपडेट कर दिया गया है। आप ऐप के एफएक्यू सेक्शन में जाएं तो आप देखेंगे कि वहां अब कई तरह के आईडी प्रूफ हैं, जिनके साथ आप रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। पीठ ने यह भी कहा कि आधार कार्ड एकमात्र आईडी नहीं है जिसे स्वीकार किया जा रहा है और अब कोई भी ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, मतदाता कार्ड, राशन कार्ड का उपयोग करके रजिस्ट्रेशन कर सकता है।

हालांकि बाद में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील मयंक क्षीरसागर ने अदालत से कहा कि रजिस्ट्रेशन के लिए CoWIN ऐप पर सात डॉक्यूमेंट सूचीबद्ध हैं। लेकिन जब आप टीकाकरण केंद्र जाते हैं तो वहां आधार पर जोर दिया जाता है और इसके बिना टीकाकरण की अनुमति नहीं दी जाती है। सारी नीतियां सिर्फ कागजों पर हैं और लोगों को इससे परेशानी हो रही है। जिसके बाद पीठ ने इसको लेकर केंद्र सरकार और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण को नोटिस जारी किया।  

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