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आसाराम के खिलाफ धीमी जांच से सुप्रीम कोर्ट नाराज

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से जानना चाहा कि इस मामले में अभी तक पीड़ित से पूछताछ क्यों नहीं की गई है। अदालत पहले ही आसाराम की कई जमानत याचिकाएं खारिज कर चुकी है।

Author नई दिल्ली | Published on: August 29, 2017 2:01 AM
आसाराम बापू। (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम के खिलाफ बलात्कार के मामले की धीमी प्रगति पर सोमवार को चिंता जताते हुए गुजरात सरकार से इस मामले की प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से जानना चाहा कि इस मामले में अभी तक पीड़ित से पूछताछ क्यों नहीं की गई है। अदालत पहले ही आसाराम की कई जमानत याचिकाएं खारिज कर चुकी है। अदालत इस समय उसकी नई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। न्यायमूर्ति एनवी रमण और न्यायमूर्ति अमिताव रॉय के पीठ ने सवाल किया कि मुकदमे की सुनवाई तेजी से करने के निर्देश के बावजूद इसमें देरी क्यों हो रही है? अभी तक पीड़ित से पूछताछ क्यों नहीं हुई?

इस पर राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुकदमे में साक्ष्यों को दर्ज करने का काम तेजी से करने संबंधी निर्देश अप्रैल में दिए गए थे। पीठ ने सवाल किया, ‘इस मामले में अभी तक पीड़िता का बयान क्यों नहीं दर्ज हुआ। वह इस मामले की सबसे अहम गवाह है।’ मेहता ने पीठ को बताया कि इस मामले के दो अहम गवाहों की हत्या हो चुकी है। एक लापता है। उन्होंने कहा कि पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद ही अदालत उससे पूछताछ की करेगी।आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगडे और वकील सौरभ अजय गुप्ता ने कहा कि उन्हें अपने मुवक्किल का बचाव करना है और यह सिर्फ पीड़िता से पूछताछ के बाद ही होगा। इसलिए वह जमानत का अनुरोध कर सकते हैं। पीड़िता के वकील ने इस मामले की तेजी से सुनवाई कराने का अनुरोध किया और कहा कि न्यायालय को उससे 23 सितंबर से पहले ही पूछताछ करने का निर्देश देना चाहिए। निचली अदालत में इस मामले की सुनवाईअब 23 सितंबर को होनी है।

पीठ ने इस पर गुजरात सरकार को मुकदमे की सुनवाई की स्थिति का ब्योरा देते हुए एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और फिर इसे दीवाली के बाद सूचीबद्ध कर दिया।शीर्ष अदालत ने 12 अप्रैल को गुजरात की निचली अदालत से कहा था कि सूरत की दो बहनों द्वारा आसाराम के खिलाफ दर्ज यौन ंिहसा के मामले में अभियोजन के गवाहों के बयान दर्ज करने का काम तेज किया जाए। न्यायालय ने निचली अदालत से कहा था कि इस मामले में पीडिता सहित अभियोजन के शेष 46 गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं।न्यायालय इससे पहले राजस्थान और गुजरात में यौन ंिहसा के दो अलग अलग मामलों में गिरते स्वास्थ्य सहित विभिन्न आधारों पर जमानत के लिए आसाराम की याचिकाएं खारिज कर चुका है। न्यायालय ने 30 जनवरी को आसाराम की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि आरोपी ने जमानत के लिए न्यायालय के समक्ष फर्जी दस्तावेज पेश किए हैं और उसने इस मामले में ऐसे दस्तावेज तैयार करने और कथित फर्जी दस्तावेज दाखिल करने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश भी दिया था।
आसाराम को जोधपुर में यौन हिंसा के एक मामले में 31 अगस्त 2013 को गिरफ्तार किया गया था और तभी से वह जेल में हैं।

 

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