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सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने पर सुप्रीम कोर्ट ने की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि केन्द्र सरकार को सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने के बारे में उसके पहले के आदेश से प्रभावित हुए बगैर ही इस पर विचार करना होगा।

Author नई दिल्ली | October 23, 2017 6:53 PM
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केन्द्र सरकार से कहा कि देश भर के सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय ध्वज संहिता में संशोधन करने पर विचार करे। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि केन्द्र सरकार को सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने के बारे में उसके पहले के आदेश से प्रभावित हुए बगैर ही इस पर विचार करना होगा। इस मामले की सुनवाई के दौरान केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि भारत एक विविधता वाला देश है और एकरूपता लाने के लिए सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाना आवश्यक है।

पीठ ने संकेत दिया कि वह एक दिसंबर, 2016 के अपने आदेश में सुधार कर सकती है। इसी आदेश के तहत देशभक्ति और राष्ट्रवाद की भावना पैदा करने के मकसद से सिनेमाघरों में फिल्म के प्रदर्शन से पहले राष्ट्रगान बजाना और दर्शकों के लिए इसके सम्मान में खड़ा होना अनिवार्य किया गया था। न्यायालय ने कहा था कि जब राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान दर्शाया जाता है तो यह मातृभूमि के प्रति प्रेम और सम्मान को दर्शाता है।

न्यायालय ने सभी सिनेमाघरों में फिल्म का प्रदर्शन शुरू होने से पहले अनिवार्य रूप से राष्ट्रगान बजाने के निर्देश के लिए श्याम नारायण चोकसी की जनहित याचिका पर यह निर्देश दिए थे। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय बाद सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाए जाने के बारे में अपने आदेश में सुधार करते हुए शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को सिनेमाघरों में राष्ट्र्रगान के दौरान खड़े होने से छूट दे दी थी। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति अमिताव राय की खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया था कि राष्ट्रगान बजाए जाने के दौरान सिनेमाघरों के दरवाजे बंद करने की जरूरत नहीं है।

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