सुप्रीम कोर्ट ने डांस बारों के नियमों में ढील दी, कहा- डांसरों को पिंजड़े में नहीं रख सकते

सुप्रीम कोर्ट ने मंच और दर्शक क्षेत्र को एक दूसरे से अलग करने के लिए रेलिंग लगाने की शर्त में संशोधन कर दिया और कहा कि सामने में तीन फुट की रेलिंग लगायी जाएगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘‘हम महाराष्ट्र सरकार को निर्देश देते हैं कि यदि कंपनियां संशोधित शर्तों का अनुपालन करती हैं तो उन्हें दस दिनों के अंदर लाइसेंस दिया जाए। (फाइल फोटो)

उच्चतम न्यायालय ने डांसबारों में पेश होने वाले कार्यक्रमों का सीसीटीवी फुटेज पुलिस को देने जैसी कुछ शर्तें बुधवार (2 मार्च) को खारिज कर दी और महाराष्ट्र सरकार से कहा कि कंपनियों द्वारा संशोधित दिशानिर्देश का अनुपालन किये जाने पर उन्हें दस दिनों के अंदर लाइसेंस दे। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति शिवा कीर्ति सिंह की पीठ ने डांसबार मालिकों को संशोधित शर्तों का अनुपालन करने के लिए तीन दिन का वक्त दिया।

पीठ ने कहा, ‘‘हम सीसीटीवी कैमरे लगाने और पुलिस को लाइव फुटेज प्रदान करने की शर्तों में संशोधन करने के पक्ष में हैं। हम निर्देश देते हैं कि सीसीटीवी केवल प्रवेश द्वार पर लगाये जाएं न कि रेस्तरां में या फिर कार्यक्रम वाले क्षेत्रों में।’’
पीठ ने कहा, ‘‘हम प्रतिवादी (महाराष्ट्र सरकार) को निर्देश देते हैं कि यदि कंपनियां संशोधित शर्तों का अनुपालन करती हैं तो उन्हें दस दिनों के अंदर लाइसेंस दिया जाए। संशोधित शर्तों का बुधवार (3 मार्च) से तीन दिन के अंदर अनुपाल किया जाएगा।’’

न्यायालय ने अधिकारियों को अदालत के निर्देश से हटने के विरुद्ध चेतावनी दी और उनसे संशोधित शर्तों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि संशोधित शर्तें बस अंतरिम हैं और उस पर राज्य में डांसबारों से संबंधित कानून में संशोधन को चुनौती देने वाली मुख्य याचिका के नतीजे का पूरा असर होगा।

महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल (एएसजी) पिंकी आनंद ने दलील दी कि बार डांसरों की सुरक्षा और अप्रिय घटनाएं रोकने के लिए कार्यक्रम वाले क्षेत्रों और रेस्तारांओं में सीसीटीवी कैमरे लगाये जाने की जरूरत है।
एएसजी ने कहा, ‘‘यदि लॉबी या प्रवेश क्षेत्रों में, न कि कार्यक्रम वाले क्षेत्र में कैमरे लगाये जाएंगे, अनियमित आचरण की संभावना हमेशा बनी रहेगी।’’

पीठ ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस वहां अपने कर्मी को तैनात कर सकती है लेकिन सीसीटीवी कैमरे कार्यक्रम वाले क्षेत्रों में नहीं लगाने दिये जा सकते हैं। अदालत ने मंच और दर्शक क्षेत्र को एक दूसरे से अलग करने के लिए रेलिंग लगाने की शर्त में संशोधन कर दिया और कहा कि सामने में तीन फुट की रेलिंग लगायी जाएगी।

इस पर एएसजी ने कहा कि रेलिंग सभी तरफ से लगायी जाएंगी क्योंकि कई बार मंच रेस्तरां के बीच में होता है। तब पीठ ने कहा, ‘‘डांस करने वालों का पिंजड़े में बंद नहीं किया जा सकता। आप उन्हें पिंजड़े में नहीं रख सकते।’’ अदालत ने यह भी कहा कि मंच पर एक बार में चार बार डांसर हो सकते हैं और बाकी डांसर अन्य स्थानों पर रह सकते हैं।

पीठ ने नृत्य करने वालों की आपराधिक पृष्ठभूमि और उनके लिए ग्रीन रूम की स्थापना की भी अनुमति दी। अन्य शर्तों में, जिनकी अदालत ने मंजूरी दी, रेस्तरां और परमिट रूम इलाके के बीच में गैरपारदर्शी विभाजक लगाये जाना शामिल हैं जिसके संदर्भ में याचिकाकर्ता इंडियन होटल्स एंड रेस्टरोंट एसोसिएशन ने पहले ही हामी भरी थी।

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