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‘सरकार से अलग विचार रखना देशद्रोह नहीं’, फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ दायर याचिका SC ने की रद्द

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच ने फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | March 3, 2021 1:15 PM
Farooq Abdullah Wife, Omar Abdullah wifeफारूक अ्बदुल्ला और पेशे से नर्स मौली ने साल 1960 में शादी रचाई थी। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ दायर एक याचिका को खारिज कर दिया। दरअसल, अब्दुल्ला पर अनुच्छेद 370 के खिलाफ बयान देने के लिए याचिका दायर कर देशद्रोह की धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सरकार से अलग विचार जाहिर करना देशद्रोह का अपराध नहीं।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच ने फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। बता दें कि याचिका में मांग की गई थी कि देशविरोधी बयान के लिए फारूक अब्दुल्ला की संसद सदस्यता रद्द की जाए और उन पर आईपीसी की धारा-124ए के तहत कार्रवाई की जाए।

क्या बोले थे फारूक अब्दुल्ला?: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने पिछले साल अनुच्छेद 370 व 35ए के संबंध में कहा था कि इन दोनों धाराओं की बहाली में चीन से मदद मिल सकती है। 370 हटाना हमें कबूल नहीं है. जब तक 370 बहाल नहीं होता तब तक हम लोग रुकने वाले नहीं हैं। बता दें कि भारत सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया था। बाद में राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था।

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