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सुप्रीम कोर्ट से फिर मिली निराशा सोमनाथ भारती को

घरेलू हिंसा और पत्नी की हत्या की कथित कोशिश के आरोप में दर्ज मामले में गिरफ्तार आप विधायक सोमनाथ भारती को सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
Author नई दिल्ली | October 2, 2015 09:41 am
पुलिस हिरासत में तीन दिन और पूछताछ होगी सोमनाथ से

घरेलू हिंसा और पत्नी की हत्या की कथित कोशिश के आरोप में दर्ज मामले में गिरफ्तार आप विधायक सोमनाथ भारती को सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने सोमवार को भारती की पत्नी लिपिका को उपस्थित होने का निर्देश दिया है ताकि उसकी ओर से दर्ज कराए गए मामले में मध्यस्थता के विकल्प की संभावना तलाशी जा सके। उधर शहर की एक अदालत ने भारती की पुलिस हिरासत की अवधि चार अक्तूबर तक बढ़ा दी है। उनसे तीन और दिन तक हिरासत में पूछताछ होगी

इससे पहले शीर्ष अदालत ने कहा कि भारती के समर्पण करने के बाद उनकी अंतरिम जमानत की याचिका निरर्थक हो गई है। अदालत ने भारती को पांच अक्तूबर तक अंतरिम जमानत देने का उनके वकील का मौखिक अनुरोध भी ठुकरा दिया। प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू और न्यायमूर्ति अमिताव राय की पीठ ने कहा कि वे मजिस्ट्रेट की अदालत में कार्यवाही के नतीजे का इंतजार करेंगे, जहां इस विधायक को पुलिस हिरासत की अवधि पूरी होने पर पेश किया जाएगा।

पीठ ने कहा- देखते हैं कि मजिस्ट्रेट क्या करते हैं। अगर किसी वजह से कुछ नहीं हुआ तो हम सोमवार को देखेंंगे। लेकिन जब भारती की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मण्यम निरंतर बहस करते रहे और कहा कि उनकी चिंता इस बात को लेकर है कि भारती के समर्पण करने और उनकी याचिका शीर्ष अदालत में लंबित होने के तथ्य के बावजूद निचली अदालत ने उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया। इस पर पीठ ने उन्हें आगाह किया कि उन्हें यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि सुनवाई की अगली तारीख पर जमानत मिल ही जाएगी।

पीठ ने जब यह महसूस किया कि सुब्रह्मण्यम ने उसकी टिप्पणियों के बारे में यह मान लिया है कि सोमवार को भारती को जमानत मिल जाएगी तो उसने कहा- इसे आश्वासन नहीं मानना चाहिए। हम विचार करेंगे। हमारे पास जमानत देने का अधिकार है। इस टिप्पणी से हतप्रभ सुब्रह्मण्यम ने कहा कि अदालत आश्वासन नहीं बल्कि सिर्फ आदेश दे सकती है। इस पर न्यायमूर्ति राय ने कहा कि आखिरकार आदेश पारित करना तो अदालत का ही विशेषाधिकार है। उन्होंने कहा कि हम तो सिर्फ स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं।

अंत में पीठ ने भारती की ओर से उनके वकील का लिखा गया पत्र रिकार्ड पर लिया, जिसमें कहा गया है कि मालवीय नगर से आप के विधायक अपने बच्चों की खातिर मध्यस्थता के माध्यम से अपनी पत्नी के साथ समझौता करना चाहते हैं। पीठ ने उनकी पत्नी को नोटिस जारी किया और उन्हें सोमवार को उपस्थित होने का निर्देश दे दिया ताकि मध्यस्थता की संभावना के बारे में उनका रुख पता चल सके।

इससे पहले सुनवाई शुरू होते ही सुब्रह्मण्यम ने कहा कि भारती ने 28 सितंबर को दिए गए आश्वासन का पालन करते हुए उसी दिन रात में दस बजे पुलिस के समक्ष समर्पण कर दिया था। परंतु गिरफ्तारी के पर्चे में उनकी गिरफ्तारी को सही तरीके से नहीं दिखाया गया है। यही नहीं उन्होंने शिकायत की कि विधायक को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने से पहले अपने वकील से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।

दिल्ली पुलिस की ओर से अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने पुलिस कार्यवाही पर सवाल उठाए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अग्रिम जमानत की याचिका खारिज करने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ उनकी अपील अब निरर्थक हो गई है और वे मध्यस्थता के मामले में आड़े नहीं आ रहे हैं। पीठ ने यह भी कहा कि हमने यह अपील लंबित रखी है क्योंकि हम जानना चाहते हैं कि क्या उनकी पत्नी मध्यस्थता के पक्ष में हैं।

इस बीच शहर की एक अदालत ने भारती की पुलिस हिरासत की अवधि चार अक्तूबर तक बढ़ा दी है। उनसे तीन और दिन तक हिरासत में पूछताछ होगी। पुलिस हिरासत की दो दिन की अवधि खत्म होने पर 41 वर्षीय भारती को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट मणिका के सामने पेश किया गया और जांचकर्ताओं ने हिरासत पांच दिन बढ़ाने का अनुरोध करते हुए कहा कि पिछली समयावधि ‘पर्याप्त नहीं’ थी।

पुलिस ने कहा कि भारती से हिरासत में और पूछताछ की जरूरत है क्योंकि इस मामले में कई बिंदुओं पर जांच की जानी है और वे जांच में सहयोग भी नहीं कर रहे हैं। पुलिस ने कहा कि भारती की हिरासत यह जानने के लिए भी जरूरी है कि गिरफ्तारी से बचने के वक्त किन लोगों ने उन्हें शरण दी। आरोप है कि उन लोगों की आपराधिक पृष्ठभूमि थी। एजंसी ने कहा कि उसे चाकू और गहने भी बरामद करने हैं।

भारती की ओर से पेश अधिवक्ता विजय अग्रवाल ने पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में पहले ही लंबित है। सुनवाई के दौरान पूर्व विधि मंत्री ने पुलिस के हाथों उत्पीड़न का आरोप लगाया। भारती ने कहा, डीसीपी ने मेरा कुर्ता पकड़ा और मुझे निर्वस्त्र करने का प्रयास किया। पुलिस एक चाकू लेकर आई और मुझसे यह स्वीकार करने के लिए कहा कि यह जांच के दौरान बरामद हुआ है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने कुछ कागजात पर उनके दस्तखत लेने का भी प्रयास किया।

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