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गुजरात सरकार ने फैक्ट्री एक्ट के प्रावधान का हवाला दे बढ़ा दिए थे काम के घंटे, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की प्रदेश सरकार की अधिसूचना

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, केएम जोसेफ और इंदु मल्होत्रा की पीठ ने कहा है कि महामारी की स्थिति वैधानिक प्रावधानों को खत्म करने का कारण नहीं हो सकती है। ये प्रावधान श्रमिकों को सम्मान और अधिकार प्रदान करते हैं।

Gujarat govt, CM vijay rupani, supreme court, covid-19सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार की अधिसूचना को चुनौती देने के मामले में फैसला सुनाया। (फाइल फोटो)

गुजरात सरकार को प्रदेश की विनिर्माण इकाइयों में 12 घंटे काम की अनुमति देने के मामले में बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार की उस अधिसूचना को खारिज कर दिया है जिसमें फैक्टरी अधिनियम 1948 के तहत दिए गए विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए काम के घंटे बढ़ाए जाने की बात कही गई थी।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, केएम जोसेफ और इंदु मल्होत्रा की पीठ ने कहा है कि महामारी की स्थिति वैधानिक प्रावधानों को खत्म करने का कारण नहीं हो सकती है। ये प्रावधान श्रमिकों को सम्मान और अधिकार प्रदान करते हैं। इस संदर्भ में, पीठ ने कहा है कि फैक्ट्री एक्ट के सेक्शन 5 के तहत महामारी “सार्वजनिक आपातकाल” नहीं है। 23 सितंबर को, पीठ ने गुजरात सरकार द्वारा 17 अप्रैल, 2020 को जारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका में आदेशों को सुरक्षित रखा था।

सरकार की तरफ से यह अधिसूचना फैक्ट्री एक्ट के सेक्शन 5 के तहत 20 अप्रैल से 19 जुलाई 2020 की अवधि के लिए जारी की गई थी। इससे पहले गुजरात ने विनिर्माण इकाइयों में 12 घंटे काम की अनुमति दे दी थी। इसमें कहा गया था कि कर्मचारियों को बढ़े हुए काम के घंटों में काम करने पर सामान्य वेतन का दोगुना भुगतान नहीं किया जाएगा।

गुजरात के श्रम विभाग ने 17 अप्रैल को जारी आदेश में कहा था, ‘वेतन मौजूदा वेतन के अनुपात में होना चाहिए (उदाहरण के लिए अगर 8 घंटे का वेतन 80 रुपये है तो 12 घंटे का वेतन 120 रुपये होगा)।’ यह प्राïवधान 20 अप्रैल से शुरू होकर 3 महीने के लिए लागू होना था। गुजरात सरकार ने कहा था कि शिफ्ट इस तरह तय होनी चाहिए कि हर 6 घंटे में कर्मचारियों को आधे घंटे आराम दिया जाए।

गुजरात ने इस बदलाव के लिए विधायी मार्ग अपनाए बगैर फैक्टरी अधिनियम 1948 के तहत दिए गए विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया था जो सार्वजनिक आपातकाल की स्थिति के लिए हैं। राज्य सरकार का यह कदम इस रूप में देखा जा रहा था कि फैक्टरियों में उत्पादन सुनिश्चित हो सके और शारीरिक दूरी रखने के लिए कम कर्मचारियों के साथ काम करने पर भी उत्पादन प्रभावित न हो।

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