हरियाणा: दलितों के बहिष्कार के आरोपों पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, खट्टर सरकार को लगाई फटकार

गौरतलब है कि यह विवाद 15 जून 2017 का है, जब दलित लड़कों के एक समूह पर प्रभावी समुदाय के लोगों के ने हमला कर दिया। हमले की वजह ये थी कि दलित लड़कों ने पानी के लिए उनके हैंडपंप का इस्तेमाल किया था।

दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट, प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो सोर्स -ANI)

सुप्रीम कोर्ट ने दलितों के बहिष्कार के आरोपों पर हरियाणा की खट्टर सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। हिसार के भाटला गांव में दो साल के लिए दलितों के बहिष्कार के आरोपों पर मंगलवार को शीर्ष अदालत ने प्रदेश सरकार की खिंचाई कर डाली। अदालत ने राज्य को 8 नवंबर तक एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया, ताकि यह ज्ञात हो सके कि संबंधित मामले में प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं।

तीन न्यायाधीशों वाली पीठ के प्रमुख जस्टिस एनवी रमना ने हरियाणा सरकार के वकील से कहा, “सामाजिक बहिष्कार हो रहा था…आपकी सरकार ने कुछ नहीं किया…बहिष्कार जारी है। यह क्या हो रहा है?” जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और बीआर गवई की पीठ ने भी इस मुद्दे को “गंभीर” करार दिया। शीर्ष अदालत ने इस मामले में जांच कर रहे संबंधित पुलिस अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि वे 8 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में तमाम रिकॉर्ड के साथ मौजूद रहें।

गौरतलब है कि यह विवाद 15 जून 2017 का है, जब दलित लड़कों के एक समूह पर प्रभावी समुदाय के लोगों के ने हमला कर दिया। हमले की वजह ये थी कि दलित लड़कों ने पानी के लिए उनके हैंडपंप का इस्तेमाल किया था। इस मामले में हरियाणा सरकार को निर्दश दिया गया कि वह 2 जुलाई, 2017 से प्रभावी समुदाय द्वारा लगाए गए सामाजिक बहिष्कार को तुरंत खत्म कराए। साथ ही उन सभी को दंडित भी किया जाए जिन्होंने इस सामाजिक बहिष्कार को लागू कराया था।

तमाम मीडिया रिपोर्ट में भाटला गांव की स्थिति का जिक्र किया गया। एक मीडिया रिपोर्ट में मामले से जुड़े पीड़ित ने बताया था कि गांव में समाजिक बहिष्कार की वजह से गंभीर स्थिति बनी हुई है। दलित समुदाय को रोजमर्रा के सामान के लिए हांसी जाना पड़ता है। साथ ही उनके लिए बिजली और पानी के सेवा भी बाधित है। सड़कों और खेतों के किनारे घांसों पर कीटनाशक छिड़क दिए गए हैं, ताकि दलित लोग अपने पशुओं के चारे का प्रबंध न कर सकें। गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं।

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