कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने की केंद्र की तारीफ़, कहा- और देश नहीं कर पाए ये काम

एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया के इस टिप्पणी पर कि ‘कोरोना वायरस अब महामारी नहीं रह गया है, लेकिन जब तक सबको वैक्सीन नहीं लग जाती है, तब तक सतर्क रहें’ का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे बयान दिए जाने जरूरी हैं।

Covid-19, Corona Pandemic
कोर्ट ने कहा कि लोगों का भरोसा बढ़ाना जरूरी है। ताकि लोग अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए खुलकर जी सके। (इंडियन एक्सप्रेस)

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कोविड महामारी से निपटने के लिए केंद्र द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की और कहा कि भारत ने जो किया है वह कोई दूसरा देश नहीं कर पाया। शीर्ष अदालत ने केंद्र द्वारा कोविड के कारण जानमाल के नुकसान के मुआवजे का भुगतान करने पर दायर हलफनामों को रिकॉर्ड किया और कहा कि वह इस पर उचित आदेश पारित करेगा।

हाल ही में एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा था कि कोरोना वायरस अब महामारी नहीं रह गया है। हालांकि उन्होंने लोगों से यह भी कहा था कि जब तक भारत में हर व्यक्ति को वैक्सीन नहीं लग जाती है, तब तक सतर्क रहने की जरूरत है। उनके इस बयान का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे बयान दिए जाने जरूरी हैं, क्योंकि लोगों को लगता है कि महामारी खत्म हो गई है और वे एक स्वतंत्र पक्षी की तरह व्यवहार खुलकर जीना शुरू कर देंगे।

इसके पहले केंद्र सरकार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने कोविड-19 से जान गंवा चुके लोगों के परिजन को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की सिफारिश की है। केंद्र ने कहा कि कोविड-19 राहत कार्य में शामिल रहने या महामारी से निपटने के लिए तैयारियों से जुड़ी गतिविधियों में शामिल रहने के चलते संक्रमण से जान गंवाने वालों के परिजन को भी अनुग्रह राशि दी जाएगी। सरकार ने कहा कि एनडीएमए ने शीर्ष न्यायालय के 30 जून के निर्देशों के अनुपालन में 11 सितंबर को दिशानिर्देश जारी किया। न्यायालय ने प्राधिकरण को अनुग्रह राशि सहायता के लिए दिशानिर्देशों की सिफारिश करने कहा था।

प्राधिकरण के दिशानिर्देशों में कहा गया है कि यह सहायता राशि कोविड-19 की पहली और दूसरी लहर में जान गंवा चुके लोगों तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि महामारी की भविष्य में आ सकने वाली लहर में भी और अगली अधिसूचना तक जारी रहेगी। केंद्र ने कोविड-19 से जान गंवा चुके लोगों के परिवार के सदस्यों के लिए अनुग्रह राशि सहायता की मांग करने वाली याचिकाओं पर कहा कि एनडीएमए ने बीमा तंत्र के सिलसिले में 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर चर्चा/परामर्श शुरू कर दिया है।

केंद्र ने कहा, ‘‘सुझाए गये इन बीमा तंत्र के लिए जमीनी कार्य करने को लेकर आगे के अध्ययन किये जा रहे हैं।’’ सरकार ने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के मुताबिक, कोविड-19 से मौत होने की बात प्रमाणित होने पर अनुग्रह राशि दी जाएगी। केंद्र ने कहा कि अनुग्रह राशि राज्य आपदा मोचन कोष (एसडीआरएफ) से राज्यों द्वारा मुहैया की जाएगी और जरूरी दस्तावेज सौंपने के 30 दिनों के अंदर सभी दावों का निपटारा किया जाएगा तथा आधार से जुड़े प्रत्यक्ष नकद अंतरण (डीबीटी) प्रक्रिया के जरिए राशि हस्तांतरित की जाएगी।

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