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‘यह कोई पिकनिक स्‍पॉट नहीं’, सुप्रीम कोर्ट ने आयकर विभाग पर लगाया 10 लाख रुपये जुर्माना

याचिका में विभाग ने कहा कि साल 2012 में कोर्ट में दाखिल किया गया मिलता-जुलता मामला अभी तक लंबित है। बाद में विभाग ने जिस मामले को लंबित बताया था, उस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2012 में ही निपटा दिया था।

भारत की सुप्रीम कोर्ट। Express photo by Abhinav Saha.

सुप्रीम कोर्ट ने आयकर विभाग को लंबित अपील के बारे में गलत बयानी करने पर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफतौर पर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पिकनिक प्लेस नहीं है और इस तरह का व्यवहार भी उसके साथ नहीं किया जा सकता है। इस बेंच के प्रमुख जस्टिस मदन बी. लोकुर ने विभाग पर 10 लाख रुपये का जुर्माना ठोंका है। बेंच ने आयकर विभाग के आयुक्त के जरिए केंद्र सरकार को फटकार लगाई और कहा कि ये चौंकाने वाली बात है कि केंद्र सरकार मामलों केा इतने हल्के तरीके से ले रही है।

इस बेंच में जस्टिस एस. अब्दुल नज़ीर और जस्टिस दीपक गुप्ता भी शामिल थे। उन्होंने भी अपने आदेश में लिखा कि आयकर विभाग द्वारा दाखिल की गई 596 दिनों की देरी से दाखिल की गई है। जबकि देरी के लिए बताए गए कारण अपर्याप्त और असंतुष्ट करने वाले हैं। बेंच ने आयकर विभाग के वकील से कहा, ”कृपा करके ये न करें। सुप्रीम कोर्ट पिकनिक प्लेस नहीं है। क्या ये भारत की सुप्रीम कोर्ट से व्यवहार का सही तरीका है? आप सुप्रीम कोर्ट से ऐसा व्यवहार नहीं कर सकते हैं।”

शीर्ष कोर्ट ने पाया कि गाजियाबाद के आयकर आयुक्त के द्वारा दाखिल की गई याचिका में विभाग ने कहा कि साल 2012 के अगस्‍त में कोर्ट में दाखिल किया गया मिलता-जुलता मामला अभी तक लंबित है। बाद में ये पाया गया कि विभाग ने जिस मामले को लंबित बताया था, उस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2012 में ही निपटा दिया था। बेंच ने कहा, ”दूसरे शब्दों में याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने पूरी तरह से भ्रामक बयान दिया है। हम चकित है कि आयकर आयुक्त के जरिए केंद्र सरकार मामले को इतने हल्के तरीके से ले रही है।” बेंच ने अपने आदेश में ये बात कहकर याचिका को खारिज कर दिया।

कोर्ट ने कहा,”जैसा हमने पाया, इस मामले में याचिका दायर करने में 596 दिनों की देर की गई। देरी के संबंध में दी गई सफाई अनुपयुक्त है। इसके अलावा इससे मिलते—जुलते दीवानी मामले के संबंध में भी भ्रामक जानकारी दी गई है।” कोर्ट ने कहा कि विभाग चार हफ्तों के भीतर 10 लाख रुपये सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति में जमा करवाएगा। ये राशि नाबालिग न्याय के मामलों में इस्तेमाल की जाएगी।

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