Supreme Court Notice Centre on Plea for challenge Triple talaq - Jansatta
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तीन तलाक को चुनौती देने वाली अर्जी पर केंद्र को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

तलाक-ए-बिद्दत के तहत कोई मुस्लिम पुरुष एक ही बार में तीन बार तलाक बोलकर पत्नी को एकतरफा तलाक देता है।

Author नई दिल्ली | August 26, 2016 8:35 PM
अमेरिका में बैठे पति ने व्हॉट्सऐप की डीपी लगाकर पत्नी को दिया तलाक। (Representative Image)

अपने पति द्वारा दुबई से फोन पर तलाक दिए जाने के बाद एक मुस्लिम महिला ने एक से ज्यादा शादी, तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) और निकाह हलाला जैसी मुस्लिम धर्म की प्रथाओं को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। महिला की इस अर्जी पर न्यायालय ने शुक्रवार (26 अगस्त) को केंद्र सरकार से जवाब तलब किया। तलाक-ए-बिद्दत के तहत कोई मुस्लिम पुरुष एक ही तुह्र (दो मासिक धर्म के बीच की अवधि) या संभोग के बाद एक तुह्र में एक से ज्यादा बार तलाक बोलकर अपनी पत्नी को तलाक देता है या फिर एक ही बार में तीन बार तलाक बोलकर एकतरफा तलाक देता है।

निकाह हलाला किसी महिला की किसी अन्य व्यक्ति से शादी से जुड़ी प्रथा है जिसमें पुरुष एक महिला को तलाक दे देता है ताकि महिला का पिछला पति उससे फिर शादी कर सके। अपने पति द्वारा दुबई से फोन पर तीन बार तलाक बोलने के कारण तलाकशुदा हुईं 26 साल की मुस्लिम महिला, जो कोलकाता की रहने वाली है, की अर्जी पर विचार करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय एवं अन्य को नोटिस भेजा।

अदालत ने वकील वी के बैजू के जरिए दाखिल इस अर्जी को उन याचिकाओं के साथ जोड़ दिया जिन पर छह सितंबर को सुनवाई होने वाली है। याचिकाकर्ता इशरत जहां ने न्यायालय से यह घोषित करने की मांग की है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट-1937 की धारा-2 असंवैधानिक है क्योंकि यह अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद-15 (भेदभाव के खिलाफ अधिकार), अनुच्छेद-21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद-25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है।

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