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रिटायरमेंट से पहले आखिरी दिन साथ बैठे CJI दीपक मिश्रा और जस्टिस चेलेमेश्वर, 25 मिनट की बातचीत

दरअसल यह एक रिवाज है जिसके तहत सेवानिवृत्त होने वाले जज अपने कार्यदिवस के अंतिम दिन मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट में बैठते हैं। इस दौरान सभी जजों के बीच कुछ देर तक बातचीत भी हुई।

Author May 18, 2018 7:41 PM
जस्टिस चेलेमेश्वर। (फोटो सोर्स: पीटीआई)

जस्टिस चेलेमेश्वर 22 जून को सेवानिवृत हो जाएंगे लेकिन सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार (18 मई) को जस्टिस चेलेमेश्वर का आखिरी कार्य दिवस था। चेलेमेश्वर सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठता में दूसरे नंबर पर थे। दरअसल 22 जून से पहले 19 मई से सुप्रीम कोर्ट गर्मी की छुट्टियों में बंद हो रहा है और 2 जुलाई को अदालत फिर खुल जाएगी। इस हिसाब से जस्टिस चेलेमेश्वर अदालत के खुलने से पहले ही सेवानिवृत्त हो गए होंगे। इसलिए शुक्रवार को ही जस्टिस चेलेमेश्वर का सुप्रीम कोर्ट में आखिरी कार्य दिवस था। अंतिम दिन जस्टिस चेलेमेश्वर मुख्य न्यायाधिश दीपक मिश्रा और जस्टिस डीवाई चंद्रचूण के साथ बैठे थे।

दरअसल यह एक रिवाज है जिसके तहत सेवानिवृत्त होने वाले जज अपने कार्यदिवस के अंतिम दिन मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट में बैठते हैं। इस दौरान सभी जजों के बीच कुछ देर तक बातचीत भी हुई। हालांकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस चेलेमेश्वर के फेयरवेल पार्टी के लिए उन्हें न्यौता भी दिया था लेकिन जस्टिस ने इनकार कर दिया था। जस्टिस चेलेमेश्वर के रिटायरमेंट के मौके पर वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि आने वाली पीढ़ी लोकतंत्र और देश के लिए आपके अमुल्य योगदान को हमेशा याद रखेगी।

वरिष्ठ वकील राजीव दत्ता ने भी जस्टिस चेलेमेश्वर के अमूल्य योगदान के लिए उनका अभिवादन किया। वहीं वकील गोपाल शंकरनारायणन ने अपने फेयरवेल स्पीच में जस्टिस चेलेमेश्वर का धन्यवाद दिया और कहा कि जूनियर सदस्यों को आपसे काफी कुछ सीखने को मिला है। आपको याद दिला दें कि जस्टिस चेलेमेश्वर उन्हीं चार जजों में से एक हैं जिन्होंने कुछ ही दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोला था।

मार्च के महीने में उन्होंने सीजेआई को ख़त लिखकर कहा था कि न्यायिक प्रक्रिया में सरकार का हस्तक्षेप बढ़ रहा है। चारों जजों ने सीजेआई के द्वारा रोस्टर बनाने, कॉलेजियम सिस्मट सहित कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी थी। सभी जजों ने उस वक्त कॉलेजियम की बैठकों का बहिष्कार करने तथा सुप्रीम कोर्ट के कामों में पारदर्शिता और विश्वसनीयता का सवाल उठाया था।

जज के तौर पर जस्टिस चेलेमेश्वर ने अपना करियर आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से शुरू किया, जहां वो 1997 में एडिशनल जज बने। 2007 में वो गुवाहाटी के चीफ जस्टिस बने और 2010 में केरल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। अक्टूबर 2011 में वो सुप्रीम कोर्ट के जज बने। जस्टिस चेलेमेश्वर ने आधार कार्ड से जुड़े एक मामले में कड़ा फैसला देते हुए कहा था कि आधार कार्ड के ना होने की स्थिति में किसी भारतीय नागरिक को बुनियादी सेवाओं और सरकारी सब्सिडी से वंचित नहीं किया जा सकता है।

 

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