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चिंता मत कीजिए, घरवालों से कहकर आया हूं… जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने रात 9 बजे तक की 75 मामलों की सुनवाई

Supreme Court: दशहरे की छुट्टी शुरू होने से पहले 75 सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई पूरी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ शुक्रवार को निर्धारित अवधि से करीब पांच घंटे देर तक बैठी।

चिंता मत कीजिए, घरवालों से कहकर आया हूं… जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने रात 9 बजे तक की 75 मामलों की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (Express file photo)

दशहरे की छुट्टियां शुरू होने से एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने रात 9 बजे तक मामलों की सुनवाई की। दरअसल, 1 अक्टूबर 2022 से सुप्रीम कोर्ट में छुट्टियां शुरू हो रही हैं, ऐसे में जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने तय किया कि वो शुक्रवार (30 सितंबर) को सूचीबद्ध सभी मामलों की सुनवाई पूरी करके ही घर जाएंगे।

शुक्रवार सुबह जब मामलों की सुनवाई शुरू हुई तब एक वकील ने लिस्ट में अंतिम पायदान पर सूचीबद्ध अपने महत्वपूर्ण मामले का उल्लेख किया। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “चिंता न करें, मैंने अपने परिवारवालों को कहा है कि आज मैं सूचीबद्ध सभी मामलों की सुनवाई पूरी किए बिना घर नहीं आऊंगा। मैंने उनसे कहा है कि वो मेरा इंतजार न करें।”

रात 9 बजे तक की 75 मामलों की सुनवाई: पीठ के समक्ष कुल 75 मामले सूचीबद्ध थे। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की पीठ निर्धारित अवधि से करीब पांच घंटे देर तक बैठी। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने रात 9 बजकर 10 मिनट तक सुनवाई की। सामान्य तौर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सुबह साढ़े 10 बजे से दोपहर चार बजे तक सुनवाई करते हैं।

वकीलों, स्टाफ और सुरक्षा अधिकारियों को धन्यवाद: शुक्रवार रात को सुनवाई पूरी होने के बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने सभी वकीलों, स्टाफ और सुरक्षा अधिकारियों को शुक्रिया अदा किया। बेंच ने कहा कि हमें खुशी है कि हम आप सभी को सुन पाए। हम अपने धैर्यवान कोर्ट स्टाफ के आभारी हैं। हम सभी कर्मचारियों को धन्यवाद देते हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में दशहरे की छुट्टी 1 अक्टूबर से 9 अक्टूबर 2022 तक होगी।

वकील करते हैं स्थगन की मांग: शुक्रवार को सूचीबद्ध किए गए एक केस को वकील ने स्थगित करने की मांग रखी। इस पर बेंच ने कहा कि वकील ही शिकायत करते हैं कि मामले सूचीबद्ध नहीं हैं, लेकिन जब उनके मामले सामने आते हैं तो स्थगन की मांग करते हैं। स्थगन केवल कोविड-19 या परिवार में शोक के कारण मांगा जा सकता है, इसके अलावा नहीं।

हाल ही में जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि जजों को आमतौर पर अदालतों के सामान्य समय के बाद भी अपने चैंबर्स में काम करना पड़ता है और कभी-कभी यह आधी रात तक चलता है।

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First published on: 02-10-2022 at 08:51:05 am
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