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पूर्व CJI समेत चार जजों की PC पर बोले CJI बोबड़े- कुछ नहीं था, सिर्फ सही बताना था मकसद

राजस्थान हाई कोर्ट की नई बिल्डिंग का उद्घाटन करने के दौरान सीजेआई ने कहा सीजेआई ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि इस संस्था (न्यायपालिका) को खुद में सुधार करना चाहिए और नि:संदेह यह उस समय किया गया

Author Edited By मोहित Updated: December 7, 2019 7:45 PM
पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई और सीजेआई सीजेआई एस ए बोबड़े। (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) एस ए बोबड़े ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के चार जजों के प्रेस कॉन्फ्रेंस को ‘खुद में सुधार करने का एक उपाय’ करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस कुछ नहीं सिर्फ सही बताने के मकसद के लिए आयोजित की गई थी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जजों ने कोर्ट की कार्यप्रणली पर सवाल खड़े किए थे।

राजस्थान हाई कोर्ट की नई बिल्डिंग का उद्घाटन करने के दौरान सीजेआई ने कहा सीजेआई ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि इस संस्था (न्यायपालिका) को खुद में सुधार करना चाहिए और नि:संदेह यह उस समय किया गया, जब प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई थी जिसकी काफी आलोचना हुई थी। यह खुद में सुधार करने के एक उपाय से ज्यादा कुछ नहीं था और मैं इसे उचित ठहराना नहीं चाहता।’’

उन्होंने कहा, ‘‘खुद में सुधार लाने के उपायों की न्यायपालिका में जरूरत है लेकिन उन्हें प्रचारित किया जाए या नहीं, यह बहस करने का विषय है।’’  सीजेआई ने कहा, ‘‘सभी न्यायाधीश प्रतिष्ठित थे और विशेष रूप से न्यायमूर्ति (रंजन) गोगोई ने काफी क्षमता का प्रदर्शन किया तथा न्यायपालिका का नेतृत्व किया।’’

इस दौरान बोबड़े ने न्याय प्रणाली में किसी भी केस का सस्ता, त्वरित और संतोषजनक समाधान निकाला जाना चाहिए। न्यायपालिका को मौजूदा रास्ते को मजबूत करके लोगों को न्याय सुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए। इसके साथ ही हमें हमें न्यायपालिका में हो रहे बदलावों और धारणा के बारे में पता होना चाहिए।

बता दें कि जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगाई, जस्टिस मदन भीमराव और जस्टिस कुरियन जोसेफ पहली बार मीडिया के सामने आए थे और सुप्रीम कोर्ट के कामकाज पर सवाल उठाए थे। देश की सबसे बड़ी अदालत के कामकाज को लेकर चारों जजों ने जो चिट्ठी चीफ जस्टिस को भेजी थी, वह सार्वजनिक कर दी गई। चिट्ठी के मुताबिक, इस कोर्ट ने कई ओसे न्यायिक आदेश पारित किए हैं, जिनसे चीफ जस्टिस के कामकाज पर असर पड़ा, लेकिन जस्टिस डिलिवरी सिस्टम और हाई कोर्ट की स्वतंत्रता बुरी तरह प्रभावित हुई है।

सीजेआई एस ए बोबड़े ने हैदरबाद एनकाउंटर पर भी अपने विचार रखें। उन्होंने हैदराबाद रेप के आरोपियों को कथित मुठभेड़ में मारे जाने पर उन्होंने कहा कि न्याय तुरंत नहीं दिया जा सकता। न्याय को बदले की भावना के तहत नहीं दिया जा सकता। मुझे लगता है कि बदले के तहत लिया गया न्याय अपनी पहचान खो देता है। न्यायपालिका में आत्म-सुधार के उपायों को लागू करने की जरूरत है।

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