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SC जज लिखवा रहे थे फैसला, तभी रोने लगा बच्चा, झल्लाकर बोले- बंद कीजिए माइक

सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि क्या आप अपना माइक म्यूट कर सकते हैं। हम बच्चे के रोने की आवाज सुन रहे हैं और हमें फैसला पढ़ने में मुश्किल हो रही है।

Supreme Court, Live Law,फैसला पढ़ने के दौरान बच्चे की आवाज से जज साहब को दिक्कत हो रही थी। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प वाकया सामने आया। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एल नागेश्वर राव एक मामले का फैसला पढ़ रहे थे। यह सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रही थी। इस दौरान जज को बच्चे के रोने की आवाज सुनाई थी।  जज साहब ने झल्लाकर माइक बंद करने को कहा। उन्हें फैसला पढ़ने में दिक्कत आ रही थी जिसके बाद उन्होंने माइक बंद करने को कहा। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि क्या आप अपना माइक म्यूट कर सकते हैं। हम बच्चे के रोने की आवाज सुन रहे हैं और हमें फैसला पढ़ने में मुश्किल हो रही है।

बता दें कि इससे पहले जस्टिस एल नागेश्वर राव के नेतृत्व वाली बेंच ने आरक्षण को लेकर एक अहम बात कही।उन्होंने कहा कि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने 2020-21 सत्र में मेडिकल के स्नातक, पीजी और डेन्टल पाठ्यक्रमों के लिये अखिल भारतीय कोटे में तमिलनाडु द्वारा छोड़ी गयी सीटों में राज्य के कानून के तहत अन्य पिछड़े वर्गो के लिये 50 फीसदी सीटें आरक्षित नहीं करने के केन्द्र के निर्णय के खिलाफ राजनीतिक दलों की याचिकाओं पर विचार करने से गुरुवार को इंकार कर दिया।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट की पीठ ने अन्नाद्रमुक, द्रमुक, वाइको, अंबुमणि रामदास, मार्क्सवादी पार्टी , तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी और कम्युनिस्ट पार्टी के वकीलों से कहा कि वे राहत के लिये मद्रास उच्च न्यायालय जायें। पीठ ने इस मामले की वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान कहा, ‘‘आप इसे वापस लीजिये और मद्रास उच्च न्यायालय जायें।’’

पीठ ने राजनीतिक दलों को ऐसा करने की छूट प्रदान की। इन राजनीतिक दलों ने मेडिकल के वर्तमान शैक्षणिक सत्र के दौरान तमिलनाडु द्वारा छोड़ी गयी सीटों में राज्य के आरक्षण कानून के तहत अन्य पिछड़े वर्गो के लिये 50 फीसदी स्थान आरक्षित नहीं करने के केन्द्र के फैसले को चुनौती दी थी।

(भाषा इनपुट्स के साथ)

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