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Delhi Violence: सुप्रीम कोर्ट में साफ बोले जज- पुल‍िस ने अपना काम क‍िया होता तो द‍िल्‍ली का यह हाल नहीं होता

Delhi Violence, Delhi Protest Today News: जस्‍ट‍िस जोसेफ ने कहा- अगर आप पुल‍िस को कार्रवाई नहीं करने देंगे तो हालात नहीं बदलेंगे। यूके में देख‍िए, पुल‍िस कैसे ऐक्‍शन लेती है। क्‍या उन्‍हें क‍िसी की इजाजत लेनी पड़ती है?

दिल्ली में हिंसा पर उतारू भीड़। (Express Photo: Praveen Khanna)

Delhi Violence, Delhi Protest Today News: द‍िल्‍ली के कई इलाकों में फैली ह‍िंसा के ल‍िए सुप्रीम कोर्ट के जज ने बुधवार को एक तरह से पु‍ल‍िस को ज‍िम्‍मेदार ठहराया। जस्‍ट‍ि‍स के.एम. जोसेफ ने साफ कहा क‍ि अगर द‍िल्‍ली पुल‍िस ने लोगों को भड़काऊ ट‍िप्‍पण‍ियां करने से वक्‍त पर रोका होता तो सांप्रदाय‍िक भीड़ की ह‍िंसा में गई जानें बचाई जा सकती थीं।

उनकी इस मौख‍िक ट‍िप्‍पणी पर सॉलि‍स‍िटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘इस तनाव भरे वक्‍त में ऐसी बातों से पुल‍िस का मनोबल टूट सकता है।’ मेहता की बात पर जस्‍ट‍िस जोसेफ ने जवाब द‍िया- मैं तो बोलूंगा। जस्‍ट‍िस जोसेफ और एसके कौल ने मेहता से कहा- पहले हमें सुन लीज‍िए, इसमें कोई हान‍ि नहीं है। यहां समस्‍या का मूल है पुल‍िस में पेशेवर रवैये की कमी। अगर आपने कानून के तहत काम क‍िया होता तो आज हालात कुछ और होते। मेहता बार-बार यही कहते रहे क‍ि हमारा एक स‍िपाही शहीद हुआ है, डीसीपी घायल हुआ है। वह वेंटीलेटर पर है। इस वक्‍त ऐसी बातों से पुल‍िस का मनोबल नहीं तोड़ा जाना चाह‍िए।

जस्‍ट‍िस जोसेफ ने कहा- अगर आप पुल‍िस को कार्रवाई नहीं करने देंगे तो हालात नहीं बदलेंगे। यूके में देख‍िए, पुल‍िस कैसे ऐक्‍शन लेती है। क्‍या उन्‍हें क‍िसी की इजाजत लेनी पड़ती है? अगर कोई भड़काऊ बातें करता है तो पुल‍िस तुरंत ऐक्‍शन में आती है। जस्‍ट‍िस कौल बोले- बीते कुछ द‍िनों में जो भी हुआ है (ह‍िंसा), अफसोसनाक है।

इस पर मेहता ने आग्रह क‍िया- अफसोसनाक जैसे शब्‍दों का प्रयोग न क‍िया जाए। जस्‍ट‍िस कौल बोले- जो हुआ वह अफसोसनाक है, इससे कौन इनकार कर सकता है? मेहता ने जवाब द‍िया- ठीक है, पर क्‍या हुआ, क्‍यों हुआ, कैसे हुआ, इस बारे में भी आपको जानकारी होनी चाह‍िए। जजों पर उनकी बात का कोई असर नहीं हुआ और दोनों ने ह‍िंसा के ज‍र‍िए व‍िरोध जताने को पूर्ण रूप से गलत बताया।

सरकार की ओर से पेश हुआ मेहता और जजों की यह बातचीत वकील अम‍ित सहनी की एक याच‍िका पर सुनवाई के दौरान हुई। याच‍िका में मांग की गई है क‍ि शाहीन बाग में बैठे प्रदर्शनकार‍ियों को क‍िसी और जगह भेजा जाए, क्‍योंक‍ि उनके प्रदर्शन के चलते आम लोगों की आवाजाही बंद है और इस इलाके में ट्रैफ‍िक संबंधी मुश्‍क‍िलें बढ़ गई हैं। बता दें क‍ि जज और सॉल‍िस‍िटर जनरल की बातचीत का यह ब्‍योरा ‘द ह‍िंंदू’ में कृष्‍णदास राजगोपाल की र‍िपोर्ट की शक्‍ल में छपी है।

सुप्रीम कोर्ट ने याच‍िका पर कोई अंतर‍िम आदेश देने से इनकार कर द‍िया और कहा क‍ि इस मामले को द‍िल्‍ली हाई कोर्ट ही देखेगा। प‍िछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन को वार्ताकार न‍ियुक्‍त करते हुए शाहीन बाग के प्रदर्शनकार‍ियों को क‍िसी और जगह चले जाने के ल‍िए मनाने की ज‍िम्‍मेदारी दी थी। दोनों ने कोर्ट को सीलबंद ल‍िफाफे में अपनी र‍िपोर्ट सौंपी है। कोर्ट अब इस मामले में 23 मार्च को अगली सुनवाई करेगा।

बता दें क‍ि द‍िल्‍ली के शाहीन बाग में दो महीने से भी अध‍िक वक्‍त से संशोध‍ित नागर‍ि‍कता कानून (सीएए) के व‍िरोध में प्रदर्शन हो रहा है। प्रदर्शनकार‍ियों में ज्‍यादातर मह‍िलाएं हैं। कुछ इसी तरह का प्रदर्शन जाफराबाद में भी शुरू हुआ था। इसी को लेकर बीजेपी के कप‍िल म‍िश्रा ने धमकी दी थी क‍ि जाफराबाद की सड़क अगर 25 फरवरी तक खाली नहीं हुई तो वह सडक पर उतरेंगे।

23 फरवरी को म‍िश्रा के भाषण के बाद माहौल गरम हो गया और 24 फरवरी को ह‍िंंसा भड़क गई। 26 फरवरी, शाम पांच बजे तक इस ह‍िंंसा में 22 लोग मारे गए। इनमें एक हेड कांस्‍टेबल और खुफ‍िया ब्‍यूरो का स‍िक्‍योर‍िटी अस‍िस्‍टेंट भी शाम‍िल हैं।

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