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जब कोरोना के अनुभव बताने लगे सुप्रीम कोर्ट के जज, कहा- 18 दिन ऑफिस में ही रहना पड़ा आइसोलेट, संक्रमित पत्नी थीं घर में

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने अनुभव पश्चिम बंगाल के अवैध खनन के मामले में चल रही सुनवाई के दौरान साझा किए, उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही देश में टीकाकरण पूरा होगा।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: June 2, 2021 11:46 AM
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़। (फोटो- ट्विटर हैंडल)

भारत में कोरोनावायरस की दोनों लहरों ने आम लोगों के साथ फ्रंटलाइन वर्कर्स को भी अपना शिकार बनाया है। इनमें डॉक्टर और पुलिसकर्मियों के अलावा लोगों को न्याय दिलाने वाले वकील और जज भी शामिल रहे। आलम यह रहा कि कोरोना का असर सुप्रीम कोर्ट के जजों तक पहुंच गया और कई न्यायमूर्तियों को संक्रमित होने के बाद आइसोलेशन में रहना पड़ा। इनमें एक नाम सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जज डीवाई चंद्रचूड़ का भी रहा। एक दिन पहले ही एक मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने कोरोना से लड़ाई के अपने अनुभव अदालत में साझा किए।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कोरोना को हराने के अपने संघर्ष को साझा करते हुए कहा कि संक्रमित पाए जाने के बाद उन्हें 18 दिन के लिए अपने दफ्तर में ही आइसोलेट रहना पड़ा। इस दौरान कोई भी उनके आसपास मौजूद नहीं था। ऐसे में वे समय काटने के लिए किताबों पर निर्भर थे। अपनी व्यथा सुनाते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने उम्मीद जताई कि जल्द ही सभी का टीकाकरण पूरा होगा, जिससे सुरक्षा बढ़ सके और केसों की सुनवाई फिजिकल तौर पर शुरू हो सके।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने अनुभव पश्चिम बंगाल के अवैध खनन के मामले में चल रही सुनवाई के दौरान साझा किए। उनके साथ जस्टिस एमआर शाह भी मौजूद थे। मामले की सुनवाई के दौरान ही एक आरोपी की जमानत याचिका पर उसके वकील ने बताया कि वे कोरोना संक्रमित हो गए थे और हाल ही में जो कोरोना रिसर्च सामने आई है, उसके बाद वे खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने खुद के कोरोना संक्रमित होने के कठिन समय के बारे में बताया और कहा कि मैं नहीं चाहता था कि मेरे परिवार का कोई अन्य सदस्य संक्रमित हो। पर बाद में पत्नी भी पॉजिटव पाई गईं। ऐसे में तनाव बढ़ गया, लेकिन फिर भी मैं घर नहीं गया। इस दौरान मन को शांत रखने के लिए एक ही सहारा था और वो थी किताबें, जिन्होंने काफी मदद की।

वकीलों ने भी साझा किए अनुभव: जस्टिस चंद्रचूड़ के बाद वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पिछले साल जून में उन्हें कोरोना संक्रमण हुआ था। ठीक होने के बाद शरीर में एंटीबॉडी बनी थीं। अब उन्होंने वैक्सीन के दो डोज भी लगवा लिए, जिससे ट्रिपल प्रोटेक्शन हो गया। वहीं वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि वे कोरोना संक्रमण से बचने के लिए अपने कार्यालय में अकेले ही रहते हैं। खुद ही लाइट जलाते हैं। हालांकि एक वकील के लिए कार्यालय में अकेले रहना काफी उबाऊ है। कोई भी अंदर नहीं आता है और न ही बाहर जाता है।

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