ताज़ा खबर
 

सुप्रीम कोर्ट जज बोले- मतभेद होना राष्ट्र विरोधी नहीं है, जरूरी नहीं हमेशा सरकार सही हो

जस्टिस गुप्ता ने कहा कि नागरिकों को जब लगे की सरकार की तरफ से उठाया गया कदम उचित नहीं है तो एकजुट होना और प्रदर्शन करना उनका अधिकार है। हमेशा वे सही हों यह जरूरी नहीं लेकिन सरकार भी हमेशा सही नहीं हो सकती।

anti CAA protest, NRC in india, NPR, SC judge, Deepak gupta, right to protest, anti national, india news, Hindi news, news in Hindi, latest news, today news in Hindiजस्टिस दीपक गुप्ता एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट के जज का कहना है कि मतभेद होना राष्ट्र विरोधी नहीं है, यह तो सबसे बड़ा और अति महत्वपूर्ण अधिकार है जो संविधान ने दिया है। सोमवार को जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि आप विरोधाभासी विचार रखते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप राष्ट्र विरोधी हैं या आप देश का अपमान करते हैं। आप सरकार के खिलाफ हो सकते हैं लेकिन आप देश के खिलाफ नहीं हो सकते। उन्होंने कहा ‘देश में आजकल विरोध को देशद्रोह की तरह देखा जा रहा है। अगर किसी पार्टी को 51 फीसदी लोगों का समर्थन हासिल हो तो इसका यह मतलब नहीं है कि बाकी 49 फीसदी लोगों को पांच साल तक कुछ नहीं बोलना चाहिए।’

जस्टिस गुप्ता का बयान ऐसे समय में आया है जब नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा कि सरकार और देश में अंतर है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सवाल करना, चुनौती देना, सरकार से जवाबदेही की मांग करना हर नागरिक का अधिकार है।

जस्टिस गुप्ता सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिशन की तरफ से आयोजित  कार्यक्रम में ‘लोकतंत्र और असमहति’ विषय पर बोल रहे थे। जस्टिस गुप्ता ने कहा कि नागरिकों को जब लगे की सरकार की तरफ से उठाया गया कदम उचित नहीं है तो एकजुट होना और प्रदर्शन करना उनका अधिकार है। हमेशा वे सही हों यह जरूरी नहीं लेकिन सरकार भी हमेशा सही नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि यदि विरोध शांतिपूर्ण हो ते सरकार को उसे दबाने या कुचलने का कोई अधिकार नहीं है।

न्यायिक प्रणाली में मतभेद के महत्व का उल्लेख करते हुए जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा कि बिना निडर और स्वतंत्र न्यायपालिका के लोकतंत्र नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि जज को राजनीतिक ताकत और मीडिया के प्रभाव और खुले तौर पर मतभेद से नहीं डरना चाहिए। जज ने यह भी कहा कि हालांकि, लोकतंत्र में बहुमत की बात निहित है लेकिन बहुमत वाले निर्णय को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

विशेष रूप से फर्स्ट पास्ट द पोस्ट सिस्ट में, जिसके अंतर्गत सत्ता में बैठे लोग बहुमत का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। न्यायिक प्रणाली में मतभेद के महत्व का उल्लेख करते हुए जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा कि बिना निडर और स्वतंत्र न्यायपालिका के लोकतंत्र नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि जज को राजनीतिक ताकत और मीडिया के प्रभाव और खुले तौर पर मतभेद से नहीं डरना चाहिए।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 Donald Trump India Visit Day 2: राष्ट्रपति भवन में आयोजित रात्रि भोज में शामिल हुए ट्रंप और मेलानिया, लजीज व्यंजन का उठाया लुत्फ
2 Delhi Violence: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- शहर जल रहा है, करनी होगी कड़ी कार्रवाई
3 स्कूल में उद्धघाटन करने पहुंचे BJP MLA अपाचू रंजन, बोले- जो लोग पाकिस्तान समर्थित नारे लगा रहे उन्हें गोली मार देनी चाहिए
IPL 2020 LIVE
X