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सुप्रीम कोर्ट का यूपी सरकार को नोटिस- भड़काऊ भाषण मामले में योगी पर क्‍यों न चले मुकदमा?

भड़काऊ भाषण मामले में यूपी सरकार द्वारा कानूनी कार्रवाई चलाए जाने के लिए इजाजत नहीं दी गई थी, सरकार का कहना था कि मुकदमे के लिए जरूरी सबूत मौजूद नहीं है, जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर मुहर लगा दी थी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

उत्तर प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (20 अगस्त) को नोटिस भेजा है। यह नोटिस 2007 में यूपी के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए एक भाषण के मामले में भेजा गया है। कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा है कि 2007 में भड़काऊ भाषण देने के मामले में योगी पर मुकदमा क्यों न चले? कोर्ट ने नोटिस भेज कर योगी सरकार से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने इस नोटिस पर यूपी सरकार को जवाब देने के लिए चार हफ्तों का वक्त दिया है।

इस मामले में स्थानीय पत्रकार परवाज ने याचिका दायर की थी। 2007 में हुए गोरखपुर दंगों के बाद से ही योगी आदित्यनाथ के खिलाफ परवाज द्वारा आवाज उठाई जा रही है। इस साल की शुरुआत में जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था तब परवाज ने कहा था, ‘हमारे पास योगी आदित्यनाथ द्वारा दी गई स्पीच के वीडियो हैं और भी अन्य सारे जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं, जिनके आधार पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जा सकती है।’

आपको बता दें कि इस साल की शुरुआत में फरवरी महीने में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी आदित्यनाथ समेत आठ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाए जाने की याचिका को खारिज कर दिया था। भड़काऊ भाषण मामले में यूपी सरकार द्वारा कानूनी कार्रवाई चलाए जाने के लिए इजाजत नहीं दी गई थी, सरकार का कहना था कि मुकदमे के लिए जरूरी सबूत मौजूद नहीं है, जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर मुहर लगा दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा मुकदमा रद्द करने के फैसले के खिलाफ यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता ने योगी आदित्यनाथ पर, जो कि 2007 में गोरखपुर से बीजेपी सांसद थे, उनके ऊपर आरोप लगाया है कि उन्होंने जनवरी 2007 में मुहर्रम के दौरान भड़काऊ भाषण दिया था, जिसके बाद दंगे भड़क गए थे और जिनमें कई सारे युवाओं की मौत हुई थी।

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