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राफेल पर राहुल गांधी की बयानबाजी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कांग्रेस अध्यक्ष से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से हाल ही में राफेल फैसले पर की गई उनकी कथित अवमाननापूर्ण टिप्पणी पर सफाई मांगी है। इस संबंध में अदालत ने राहुल को एक नोटिस जारी किया है।

Author Updated: April 15, 2019 12:51 PM
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से हाल ही में राफेल फैसले पर की गई उनकी कथित अवमाननापूर्ण टिप्पणी पर सफाई मांगी है। शीर्ष अदालत ने कांग्रेस अध्यक्ष से यह सफाई एक अवमानना संबंधी याचिका पर मांगी है। इस संबंध में अदालत ने राहुल को एक नोटिस जारी किया है। राहुल गांधी को इस संबंध में मंगलवार तक जवाब देना होगा। इस मामले की सुनवाई अब 23 अप्रैल को होगी।

मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने कहा, ‘ऐसी बात जो हमने नहीं कही आप वो बात कैसे कह सकते हैं। ‘ अदालत ने कहा कि हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की है। पीठ ने कहा हम यह स्पष्ट करते हैं कि राफेल मामले में दस्तावेजों को स्वीकार करने के लिए उनकी वैधता पर सुनवाई करते हुए इस तरह की टिप्पणियां करने का मौका कभी नहीं आया।

पीठ ने कहा, ‘हम यह स्पष्ट करते हैं कि राहुल गांधी ने इस अदालत का नाम ले कर राफेल सौदे के बारे में मीडिया व जनता में जो कुछ कहा उसे गलत तरीके से पेश किया गया।’ याचिकाकर्ता मीनाक्षी लेखी का यह आरोप था कि कांग्रेस अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के हवाले से बयान दिया, ‘सुप्रीम कोर्ट ने भी यह माना है कि चौकीदार ही चोर है।’

लेखी ने इसी बयान के आधार पर याचिका दाखिल की है। लेखी का कहना है कि वह अपने व्यक्तिगत बयान को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के रूप में पेश कर रहे है। साथ ही राहुल एक पूर्वाग्रह पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

इससे पहले 10 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने राफेल मामले के संबंध में केंद्र सरकार की उन आपत्तियों को खारिज कर दिया था जिसमें सरकार ने याचिका के साथ दिए गए दस्तावेजों पर अपना विशेषाधिकार जताया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि राफेल के मामले में रक्षा मंत्रालय से फोटोकॉपी किए गए दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा। वहीं, केंद्र का कहना था कि गोपनीय दस्तावेजों की फोटोकॉपी या चोरी की कॉपी पर कोर्ट भरोसा नहीं कर सकता है।

मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद याचिकाकर्ता अरुण शौरी ने संतोष व्यक्त किया था। उन्होंने कहा था हम इस मामले में केंद्र सरकार के तर्क को खारिज करने के आदेश से खुश हैं।

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