ताज़ा खबर
 

सुप्रीम कोर्ट अमृतधारा नहीं है, हमारे पास कोई और काम नहीं है क्‍या: चीफ जस्टिस खेहर

बढ़ती जनहित याचिकाओं से परेशान सुप्रीम कोर्ट ने 27 फरवरी को कहा कि उसके पास देश की सभी बीमारियों की दवा नहीं है।

Author नई दिल्‍ली | February 28, 2017 2:38 PM
बढ़ती जनहित याचिकाओं से परेशान सुप्रीम कोर्ट ने 27 फरवरी को कहा कि उसके पास देश की सभी बीमारियों की दवा नहीं है।

बढ़ती जनहित याचिकाओं से परेशान सुप्रीम कोर्ट ने 27 फरवरी को कहा कि उसके पास देश की सभी बीमारियों की दवा नहीं है। चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्‍यक्षता वाली बैंच ने सभी धार्मिक भावनाओं का सम्‍मान करते हुए मृत शरीरों को ले जाने की व्‍यवस्‍था को लेकर दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट सभी बीमारियों की अमृत धारा नहीं है। चीफ जस्टिस ने कहा कि पुराने दिनों में वह सभी बीमारियों के लिए अमृतधारा का इस्‍तेमाल करते थे। आजकल लोग सोचते हैं कि सुप्रीम कोर्ट अमृतधारा जैसा बन गया है।

उन्‍होंने कहा, ”आज ऐसा हो गया है जैसे सुबह उठो और कहो कि चलो आज सुप्रीम कोर्ट चलता हूं। अरे आप संबंधित प्रशासन के पास क्‍यों नहीं गए। जब मैं जवान था अमृतधारा एक लोकप्रिय हर्बल दवा थी जो सभी मर्ज का इलाज थी। यदि आपको पेटदर्द तो अमृतधारा, यदि सिरदर्द है तो अमृतधारा। इन दिनों लोग सोचते हैं कि सुप्रीम कोर्ट अमृतधारा जैसा बन गया है। क्‍या यह ऐसा है कि चलो सुप्रीम कोर्ट को बर्बाद करते हैं। क्‍या हमारे पास कोई और काम नहीं है।”

याचिकाकर्ता ने कहा था कि मध्‍य प्रदेश, ओडिशा और उत्‍तर प्रदेश से ऐसी खबरें आई हैं जहां पर प्रशासन मृतकों को ले जाने के लिए पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था नहीं कर सका। याचिका में कहा गया, ”मध्‍य प्रदेश, ओडिशा और यूपी आदि में बहुत शर्मनाक और खौफनाक वाकये हुए हैं। वहां पर ऐसी अमानवीय घटनाएं हुई हैं जैसे एमपी के सिहोर में राज्‍य सरकार गाड़ी नहीं दे पाई और एक व्‍यक्ति के दामाद को उसे 30 किमी तक साइकिल पर ले जाना पड़ा। 15 दिन बाद एक और मामला एमपी में हुआ जहां एंबुलेंस ना मिलने पर एक व्‍यक्ति मृत शरीर को कंबल में लेकर गया।”

सुप्रीम कोर्ट जनहित याचिकाओं को लेकर पहले भी कड़ा रूख जता चुका है। 11 फरवरी को सीजेआई ने एक अन्‍य याचिका पर कहा था, ”बेकार और बकवास याचिकाएं बढ़ रही हैं। इसे रोकना होगा और ऐसे(बड़ी फीस लगाकर) ही रोका जा सकता है। देखो अगर तुम्‍हारा उद्देश्‍य सही है तो हम साथ हैं लेकिन इस तरह की याचिकाओं में नहीं। चाहे जो केस हो हमें सारे पन्‍ने पढ़ने होते हैं। मेरे साथी जज जवान हैं। उन्‍हें पूरा मामला जानने में दिक्‍कत नहीं है लेकिन मैं बूढ़ा हूं। मेरी सफेद दाढ़ी की ओर देखा। यह सब पढ़ने के बाद मैं थकान महसूस करता हूं।”

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App