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कृषि कानूनों के खिलाफ याचिकाओं पर SC का केंद्र को नोटिस, कहा- 4 हफ्तों के भीतर दें जवाब

राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सदस्य मनोज झा, केरल से कांग्रेस के लोकसभा सांसद टीएन प्रतापन और तमिलनाडु से द्रमुक के राज्यसभा सदस्य तिरुची शिवा और राकेश वैष्णव की तरफ से कृषि कानूनों के खिलाफ याचिका दायर की थी।

Author Edited By नितिन गौतम नई दिल्ली | Updated: October 12, 2020 5:59 PM
farm law agriculture law farmers protestकृषि कानून के खिलाफ देश में जगह जगह अभी भी विरोध प्रदर्शन जारी हैं। (एक्सप्रेस फोटो)

हाल में बनाए गए तीन कृषि कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं उच्चतम न्यायालय में दाखिल की गई हैं। अब उच्चतम न्यायालय ने इन याचिकाओं सोमवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर उसका जवाब मांगा है।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबड़े की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र से चार हफ्तों के अंदर नोटिस पर जवाब मांगा है।

तीन कानून – कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार अधिनियम -2020, कृषक उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) अधिनियम 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020 – राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी मिलने के बाद 27 सितंबर को प्रभावी हुए थे।

बता दें कि राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सदस्य मनोज झा, केरल से कांग्रेस के लोकसभा सांसद टीएन प्रतापन और तमिलनाडु से द्रमुक के राज्यसभा सदस्य तिरुची शिवा और राकेश वैष्णव की तरफ से कृषि कानूनों के खिलाफ याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ इन्हीं दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पीठ में न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यन भी शामिल हैं।

याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि है कि संसद द्वारा पारित कृषि कानून किसानों को कृषि उत्पादों का उचित मुल्य सुनिश्चित कराने के लिये बनाई गई कृषि उपज मंडी समिति व्यवस्था को खत्म कर देंगे।

याचिका में कहा गया है कि नए कानून थोक की APMC मार्केट सिस्टम को तबाह कर देंगे। जिससे किसानों को फसल का उचित दाम मिलने में दिक्कत होगी। त्रिची शिवा द्वारा दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि यह कानून असंवैधानिक है और इससे गरीब किसानों के शोषण को बढ़ावा मिलेगा।

वहीं कृषि कानूनों के विरोध के बीच मोदी सरकार ने एक बार फिर किसानों को बातचीत का न्योता दिया है। सरकार ने कृषि बिलों पर बातचीत के लिए पंजाब से कम से कम 31 किसान संगठनों और उनके नेताओं को 14 अक्टूबर को दिल्ली बुलाया है।

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