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देश के पहले लोकपाल होंगे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस पीसी घोष, सोमवार को आधिकारिक ऐलान

इससे पहले, लोकपाल की तलाश करने वाली समिति ने उनका नाम इस पद के लिए सबसे आगे चल रहे लोगों की सूची के लिए शॉर्टलिस्ट किया था।

India's first Lokpal, Lokpal, Mallikarjun Kharge, PC Ghosh, Pinaki Chandra Ghosh, supreme court, National News, Hindi Newsपीसी घोष, सुप्रीम कोर्ट से मई 2017 में रिटायर हुए थे। वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के भी वरिष्ठतम सदस्यों में से एक हैं। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः विशाल श्रीवास्तव)

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष देश के पहले लोकपाल होंगे। सोमवार (18 मार्च, 2019) को इसका आधिकारिक ऐलान किया जाएगा, जबकि शुक्रवार (15 मार्च) को हुई बैठक में उनके नाम पर सहमति बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) रंजन गोगोई, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और वकील मुकुल रोहातगी वाली चयन समिति ने घोष के नाम के लिए हरी झंडी दी है।

इससे पहले, लोकपाल की तलाश करने वाली समिति ने उनका नाम इस पद के लिए सबसे आगे चल रहे लोगों की सूची के लिए शॉर्टलिस्ट किया था। लगभग चार साल के कार्यकाल के बाद जस्टिस घोष मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए थे। मौजूदा समय में वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के वरिष्ठ सदस्यों में से एक हैं। वह इसके अलावा कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जज हैं, जबकि आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में वह चीफ जस्टिस रहे हैं।

हालांकि, जस्टिस घोष की लोकपाल पद पर नियुक्ति से पहले ही विवाद पनप गया है। आरोप लगाया जा रहा है कि इस प्रक्रिया में विपक्ष का रुख जाना ही नहीं गया। उसे शामिल ही नहीं किया गया।

‘द प्रिंट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को भी इस चयन समिति की बैठक में शामिल होने के लिए खासतौर पर न्यौता भेजा गया था, पर उन्होंने वहां जाने से साफ इन्कार कर दिया। वह बोले कि जिस व्यक्ति को खास तौर पर अलग से बुलाया जाता है उसका चयन प्रक्रिया में शामिल होने का कोई अधिकार नहीं होता, लिहाजा वह इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं सकते।

बता दें कि लोकपाल को केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के साथ मिलकर काम करना होता है। भ्रष्टाचार के रोकथाम संबंधी धारा के तहत लोकपाल किसी भी जांच एजेंसी (सीबीआई भी) को आरोपों की जांच करने के लिए आदेश दे सकता है। रोचक बात है कि हमारा कानून लोकपाल को मौजूदा और पूर्व प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसदों, सरकारी कर्मचारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों के खिलाफ दी गई शिकायतों की जांच करा सकता है।

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