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सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को याद दिलाया- असहमति लोकतंत्र का सेफ्टी वॉल्व…

पुणे पुलिस ने दावा किया है कि ये सभी एक्टिविस्ट बड़ी साजिश का हिस्सा हैं। ये सभी 35 कॉलेजों से विद्यार्थियों को भर्ती करके हमले करवाने की योजना बना रहे थे। इन एक्टिविस्ट को विवादित मानी जाने वाली गैरकानूनी गतिविधि निरोधक कानून के तहत आरोपी बनाया गया है।

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पुलिस के द्वारा कल गिरफ्तार किए गए पांच सामाजिक कार्यकताओं को आज (29 अगस्त) सुप्रीम कोर्ट ने नजरबंद रखने के आदेश दिए हैं। इन कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने माओवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाते हुए आतंकवादी निरोधक कानून के तहत गिरफ्तार किया था। लेकिन इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ” असहमति, लोकतंत्र का सेफ्टी वॉल्व है।”

कोर्ट ने कहा कि कवि और माओवादी विचारक वरवरा राव और एक्टिविस्ट सुधा भारद्वाज, अरुण फरैरा, गौतम नवलखा और वेरनोन गोंजालवेज को 6 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक नजरबंद रखा जाएगा। इसके साथ ही चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने कहा,”असहमति लोकतंत्र का सेफ्टी वॉल्व है। अगर आप सेफ्टी वॉल्व को नहीं रखेंगे तो प्रेशर कुकर फट जाएगा।”

कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कहा है कि वह गिरफ्तारियों को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना जवाब दाखिल करे। वहीं पुणे पुलिस ने दावा किया है कि ये सभी एक्टिविस्ट बड़ी साजिश का हिस्सा हैं। ये सभी 35 कॉलेजों से विद्यार्थियों को भर्ती करके हमले करवाने की योजना बना रहे थे। इन सभी एक्टिविस्ट को विवादित मानी जाने वाली गैरकानूनी गतिविधि निरोधक कानून के तहत आरोपी बनाया गया है। ये कानून पुलिस को ये अधिकार देता है कि वह किसी भी शख्स के खिलाफ छापेमारी करने और वारंट के बिना गिरफ्तार कर सके, अगर आरोपी आतंकवादी गतिविधियों में मददगार हो या गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल हो।

पुलिस ने कहा कि इन एक्टिविस्ट की गिरफ्तारी इसी साल जून में हुई पांच एक्टिविस्ट की गिरफ्तारी का ही हिस्सा है। पिछली गिरफ्तारी में पुलिस को काफी मात्रा में जानकारियां बरामद हुईं थीं। पहले गिरफ्तार किए गए लोगों पर बीती एक जनवरी को पुणे के पास भीमा कोरेगांव में होने वाले सालाना आयोजन में दलितों और मराठों के बीच संघर्ष भड़काने का आरोप लगा था।

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