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अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, अरुण जेटली मानहानि केस में याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने अरुण जेटली मान‍हानि केस में दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी है।

arvind kejriwal, supreme court, defamation case, kejriwal defemation case, arun jaitley, arun jaitley kejriwal, jansattaदिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने अरुण जेटली मान‍हानि केस में दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि इस मामले में ट्रायल चलेगा। केजरीवाल ने अपने बचाव में कहा था कि हाईकोर्ट में सिविल केस चल रहा है इसलिए ट्रायल कोर्ट की सुनवाई पर रोक लगा देनी चाहिए। इससे पहले दिल्‍ली हाईकोर्ट ने 19 अक्‍टूबर को ट्रायल कोर्ट की सुनवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हार्इकोर्ट ने कहा था कि सिविल मानहानि केस के साथ ट्रायल कोर्ट की सुनवाई अवैध नहीं है। गौरतलब है कि केजरीवाल के खिलाफ वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने मानहानि का केस किया था। जेटली ने केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के पांच अन्‍य नेताओं पर निचली अदालत में आपराधिक मानहानि का केस किया था। उन्‍होंने यह कदम आप नेताओं द्वारा उन पर दिल्‍ली एवं जिला क्रिकेट एसोसिएशन में गड़बड़ी करने का आरोप लगाने के बाद उठाया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि क्रिमिनल और सिविल मानहानि केस अलग-अलग है।

दिल्‍ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि स अदालत के समक्ष कुछ भी ऐसा नहीं पेश किया गया जिससे यह लगे कि सीएमएम के समक्ष फौजदारी कार्यवाही कानूनी प्रक्रिया का दुरच्च्पयोग है और न्याय के लिए इस अदालत के आदेश की आवश्यकता है। इस अदालत की राय है कि सीएमएम का 19 मई 2016 का आदेश जिसमें कार्यवाही जारी रखने की बात की गई थी वह दुराग्रह, अनौचित्य, अवैधता और टिकने लायक नहीं होने की बातों से मुक्त है। इसलिए अदालत सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अंतर्निहित अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने पर मजबूर नहीं है।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि सीएमएम के समक्ष फौजदारी कार्यवाही जारी रखने में कानून में कानूनन कोई अवैधता नहीं है और वह इसे जारी रखने में सक्षम है। अदालत ने केजरीवाल की याचिका पर 25 जुलाई को सुनवाई पूरी की थी। उसमें निचली अदालत के 19 मई के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने दिल्ली के मुख्यमंत्री के निचली अदालत के समक्ष फौजदारी मानहानि के मामले में सुनवाई पर दीवानी वाद पर उच्च न्यायालय के फैसला करने तक रोक लगाने की मांग की गई थी।

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