सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को लुधियाना के एक कपड़ा व्यापारी द्वारा दायर उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया जिसमें याचिका का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एआई टूल्स का इस्तेमाल करने की बात स्वीकार की गई। वहीं, व्यापारी उसमें इस्तेमाल किए गए जटिल कानूनी शब्दों की व्याख्या करने में असमर्थ था। इस पर सीजेआई ने उसे फटकार लगाई और उसकी याचिका खारिज करते हुए उसे लुधियाना जाकर स्वेटर बेचने की सलाह दी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा, ”जाओ, लुधियाना में 2-3 और स्वेटर बेचो। जिन लोगों का काम है ऐसी याचिका दाखिल करना वो नुकसान कर देंगे आपका जुर्माना लगवा कर।” जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस आर महादेवन की पीठ को उस समय संदेह हुआ जब 12वीं कक्षा तक पढ़े कपड़ा व्यापारी रजनीश सिद्धू ‘पीएम केयर फंड’ से संबंधित अपनी याचिका पर बहस करने के लिए खड़े हुए। सिद्धू ने जैसे ही लिखित दलीलें पढ़नी शुरू कीं, प्रधान न्यायाधीश ने उनकी शैक्षणिक और अन्य पृष्ठभूमि पर सवाल किया।
याचिकाकर्ता अदालत में अपनी पहली याचिका दायर करने आया था
जब याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने पहले कोई याचिका दायर नहीं की थी और वह सीधे उच्चतम न्यायालय में अपनी पहली याचिका दायर करने आया है तो प्रधान न्यायाधीश ने व्यंग्यपूर्वक कहा, ”बड़ा बहादुरी का काम किया, सीधा लुधियाना से चलकर आ गए।” सीजेआई ने कहा, ”मैं यहीं आपकी अंग्रेजी की परीक्षा लूंगा और अगर आप 30 प्रतिशत अंक भी प्राप्त कर लेते हैं तो मैं मान लूंगा कि आपने ही यह याचिका तैयार की है।” इसके बाद सीजेआई ने जनहित याचिका में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों के बारे में पूछा जिसका सिद्धू जवाब नहीं दे सके। साथ ही याचिकाकर्ता ने इस बात को स्वीकार किया कि उन्होंने याचिका तैयार करने के लिए एआई टूल्स का इस्तेमाल किया।
कोविड-रोधी टीकाकरण के दुष्प्रभाव पर दोष निर्धारण के बगैर मुआवजा देने की नीति बनाएं
उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 रोधी टीकाकरण के बाद होने वाले गंभीर दुष्प्रभाव के लिए दोष निर्धारण के बगैर मुआवजा देने की नीति तैयार करने का केंद्र सरकार को मंगलवार को निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि संविधान सरकार को कल्याण और गरिमा का सक्रिय रक्षक मानता है, न कि मानव कष्ट का महज दर्शक। न्यायालय ने कहा कि कोविड महामारी एक पीड़ा और तबाही का समय था जिसने अनगिनत परिवारों के लिए दुख और कठिनाइयां पैदा कीं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि महामारी के दौरान, सरकार ने टीकाकरण योजना बनाने में अपनी सीमाओं से आगे जाकर प्रयास किया और इसने निस्संदेह कई जीवन बचाने में मदद की। पीठ ने कहा, “लेकिन जैसा कि सरकार के अपने आंकड़े भी दर्शाते हैं, यह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि वही टीके कुछ मामलों में जीवन हानि का कारण भी बने। ऐसी स्थिति में, यह उचित नहीं है कि सरकार उन प्रभावित परिवारों की मदद करने में अपनी जिम्मेदारी से बचती रहे जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है।”
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कांग्रेस सांसद एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जुड़े कथित दोहरी नागरिकता से संबंधित मामले में सोमवार को केंद्र सरकार से रिकॉर्ड तलब किया। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
(इनपुट- पीटीआई)
