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सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कोई बड़ा आदेश मत देना, अंतरिम सीबीआई प्रमुख ने केस ही बंद करा दिया

एम नागेश्वर राव का यह फैसला इसलिए सवालों के घेरे में है क्योंकि 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सीबीआी के अंतरिम डायरेक्टर कोई भी बड़ा फैसला नहीं लेंगे। लेकिन, 11 नवंबर को इस मामले में सीबीआई के अंतरिम डायरेक्टर ने केस के दोबारा खुलने की संभावनाओं पर पूर्ण विराम लगा दिया।

सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव। (EXPRESS PHOTO)

केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) की कार्यशैली पहले से ही सवालों के घेरे में है। लेकिन, इस बीच चार्टर्ड एकाउंटेंट संजय भंडारी का केस बंद करना सवालों के घेरे में है। सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की मौखिक सिफारिश को दरकिनार करते हुए अंतरिम सीबीआई निदेशक एम नागेश्वर राव ने संजय भंडारी का मामला पूरी तरह बंद करने का आदेश दे दिया। राव ने 11 नवंबर को अपने आदेश में केस की दोबारा जांच की मांग को ठुकरा दिया।

एम नागेश्वर राव का यह फैसला इसलिए सवालों के घेरे में है क्योंकि 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सीबीआी के अंतरिम डायरेक्टर कोई भी बड़ा फैसला नहीं लेंगे। वह सिर्फ रूटीन कामकाज की देख-रेख करते रहेंगे। ताकि, एजेंसी का काम न रुक सके। लेकिन, 11 नवंबर को इस मामले में सीबीआई के अंतरिम डायरेक्टर ने केस के दोबारा खुलने की संभावनाओं पर पूर्ण विराम लगा दिया। उनकी तरफ से कहा गया कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक उन्होंने कोई नया फैसला नहीं लिया है, बल्कि रूटीन प्रक्रिया के तहत ही यह कदम उठाया गया।

गौरतलब है कि जून 2016 में संजय भंडारी और उसके दो बेटे श्रेयांश और दिव्यांग के खिलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज किया। इनके अलावा मामले में इनकम टैक्स के 9 वरिष्ठ अधिकारियों को भी शामिल किया गया। इनमें प्रिंसिपल कमिश्नर एसके मित्तल भी जांच के दायरे में आए। आरोप लगाए गए थे कि भंडारी के क्लाइंट को फायदा पहुंचाने के लिए इनकम टैक्स के अधिकारी भ्रष्टाचार वाली गतिविधि में संलिप्त थे। सीबीआई ने मामले में जांच में सबूत नहीं मिलने का हवाला देकर इसे बंद कर दिया।

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