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कोरोना से अनाथ हुए बच्चों को PM केयर्स फंड से मदद पर SC ने तलब की रिपोर्ट, कहा- लाभार्थियों की लिस्ट भी करें दाखिल

उधर, केरल सरकार ने हाईकोर्ट से कहा है कि केंद्र की वैक्सीन पॉलिसी से कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा। बेंच से सवाल किया गया कि वैक्सीन के दो रेट क्यों रखे गए हैं। जबकि रेट तय होना था कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन के हिसाब से। कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा कि क्यों राज्य वैक्सीन की सीधे खरीद नहीं कर पा रहा है?

सुप्रीम कोर्ट (एक्सप्रेस फोटो: ताशी तोब्ग्यल)

सुप्रीम कोर्ट ने पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन स्कीम के क्रियान्वयन की रिपोर्ट केंद्र से तलब की है। कोर्ट ने ये भी कहा कि सरकार ये बताए कि इस स्कीम से अब तक कितने बच्चों को बेनीफिट मिला है। कोर्ट ने ये आदेश तब दिया एमीकस क्यूरी ने कहा कि स्कीम को लेकर अभी ये स्पष्ट नहीं है कि इससे किसे लाभ मिलने जा रहा है। मामले की सुनवाई 7 जून को तय की गई है। तब तक ये रिपोर्ट देनी होगी।

जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच ने कहा कि तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, यूपी, महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड अपने यहां सेक्रेट्री या फिर ज्वाइंट सेक्रेट्री लेवल के ऑफिसर को नोडल अफसर के तौर पर तैनात करें जो एमीकस क्यूरी गौरव अग्रवाल से समन्वय बनाकर अनाथ बच्चों के मामले में जरूरी कदम उठाएंगे। एमीकस क्यूरी 6 जून तक कोर्ट को बताए कि इन राज्यों ने आदेश की पालना की या नहीं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बीते सप्ताह सभी राज्यों से कहा था कि कोविड से अनाथ हुए बच्चों के मामले में वो तत्काल जरूरी कदम उठाएं। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए आदेश की प्रतीक्षा नहीं की जानी चाहिए।

बेंच स्वत: संज्ञान लेते हुए कोरोना मामले पर बाल संरक्षण गृहों की स्थिति की सुनवाई कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने 28 मई को सभी जिला अधिकारियों को मार्च 2020 के बाद अनाथ बच्चों की जानकारी एनसीपीसीआर ‘बाल स्वराज’ के पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया था। मंगलवार को बेंच ने कहा कि एएसजी ऐश्वर्या भाटी इस योजना के लाभार्थियों की पहचान सहित योजना का विवरण दाखिल करने पर सहमत है। केंद्र उस तंत्र की जानकारी भी पेश करेगा जिसे योजना की निगरानी के लिए बनाया गया है।

बेंच ने कहा कि योजना के बारे में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिन बच्चों ने कोरोना के दौरान माता-पिता, कानूनी माता-पिता या दत्तक दोनों को खो दिया है, वो केंद्र सरकार की योजना के लाभार्थी होंगे। बेंच ने आज जब मामले की सुनवाई शुरू की तो एमीकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने बताया कि सरकार पीएम केयर्स फंड से एक योजना लेकर आई है। लेकिन इसके बारे में ज्यादा ब्योरा उपलब्ध नहीं है।

एमीकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि सरकार के अनुसार इन बच्चों की शिक्षा जारी रखने का प्रावधान इसमें है। किताबें, ड्रेस सहित शैक्षणिक आवश्यकताएं इसमें उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। 23 वर्ष की आयु में बच्चे को 10 लाख की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। उनका कहना था कि यह स्पष्ट नहीं है कि कितने बच्चे इस योजना के लाभार्थी हैं और भारत सरकार इस योजना को कैसे लागू करना चाहती है। सरकार की ओर से पेश एएसजी भाटी ने न्यायालय मित्र से सहमति जताई और कहा कि पीएम केयर्स योजना के तौर-तरीके स्पष्ट नहीं हैं।

गौरतलब है कि कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की मदद के लिए पीएम केयर फंड से कई योजनाओं का ऐलान किया गया है। कोरोना से अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों की शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक में मोदी सरकार मदद करेगी। पीएमओ ने कहा कि पीएम मोदी ने ऐलान किया है कि कोरोना महामारी में माता-पिता गंवाने वाले बच्चों की ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन’ योजना के तहत मदद की जाएगी।

पीएमओ ने कहा कि कोरोना की वजह से अनाथ हुए बच्चों को 18 वर्ष होने पर मासिक भत्ता दिया जाएगा और 23 वर्ष होने पर पीएम केयर्स फंड से 10 लाख रुपये दिए जाएंगे। उनकी मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी। पीएमओ ने कहा कि कोरोना की वजह से अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों को 18 साल की अवधि तक पांच लाख का मुफ्त हेल्थ बीमा भी मिलेगा। साथ ही ऐसे बच्चों की उच्छ शिक्षा के लिए एजुकेशन लोन दिलाने में मदद की जाएगी और इसका ब्याज पीएम केयर्स फंड से वहन किया जाएगा।
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केरल सरकार ने केंद्र की वैक्सीन पॉलिसी पर उठाए सवाल

उधऱ, एक अहम घटनाक्रम में केरल सरकार ने हाईकोर्ट से कहा है कि केंद्र की वैक्सीन पॉलिसी से कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा। स्टेट अटॉर्नी केवी सोहन ने जस्टिस मोहम्मद मुश्ताक, जस्टिस कौसर की बेंच से सवाल किया कि वैक्सीन के दो रेट क्यों रखे गए हैं। जबकि रेट तय होना था कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन के हिसाब से। प्राइवेट कंपनियों को इससे खुली छूट मिल गई है और वो कालाबाजारी कर रही हैं। कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा कि क्यों राज्य वैक्सीन की सीधे खरीद नहीं कर पा रहा है। निजी कंपनियों और अस्पतालों को वैक्सीन कंपनियां तरजीह क्यों दे रही हैं। वकील का कहना था कि राज्य अपना पैसा लगाकर वैक्सीन खरीदने को तैयार है लेकिन फिर भी उन्हें टीका नहीं मिल पा रहा है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्राइवेट प्लेयर्स की जगह राज्य सरकार को टीका खरीद में प्राथमिकता क्यों नहीं मिल रही है? मामले की सुनवाई अगले सप्ताह की जाएगी।

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