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सुप्रीम कोर्ट ने NJAC को गैरकानूनी बताया, कॉलेजियम ही करेगी जजों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, जानिए दोनों का फर्क

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसला सुनाया। हायर ज्‍यूडिशियरी में जजों की बहाली के लिए कॉलेजियम की जगह नई व्‍यवस्‍था के तौर पर एनजेएसी (राष्‍ट्रीय न्‍यायिक नियुक्ति आयोग) को गैरकानूनी करार दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसला सुनाया। हायर ज्‍यूडिशियरी में जजों की बहाली के लिए कॉलेजियम की जगह नई व्‍यवस्‍था के तौर पर एनजेएसी (राष्‍ट्रीय न्‍यायिक नियुक्ति आयोग) को गैरकानूनी करार दिया।

एनजेएसी एक्‍ट को संविधान के 99वें संशोधन के जरिए एनडीए सरकार ने अमल में लाया था। पर शुक्रवार को सुप्रीम कोेर्ट की बेंच ने इस संशोधन को भी असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया।

अब क्‍या होगा
या तो 22 साल पुरानी कॉलेजियम व्‍यवस्‍था के जरिए जजों की बहाली होगी या फिर सरकार संसद में फिर से कानून बना कर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट सकती है।
कॉलेजियम सिस्टम और एनजेएसी का फर्क जानिए…

1. एनजेएसी का प्रमुख चीफ जस्टिस को बनाने की बात थी। इसमें सुप्रीेम कोर्ट के 2 वरिष्ठ जजों, कानून मंत्री और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ीं 2 जानी-मानी हस्तियों को बतौर सदस्य शामिल करने की बात थी। यही लोग मिल कर जजों की बहाली से जुड़े फैसले लेते।

3. कॉलेजियम सिस्टम में चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों का एक फोरम यह काम करता है। यानी इसमें ज्‍यूडिशियरी के लोगों के अलावा किसी और का दखल नियुक्ति-तबादले में नहीं है।

4. कॉलेजियम सिस्टम 28 अक्टूबर 1998 को 3 जजों के मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के जरिए प्रभाव में आया था। संविधान में इसका जिक्र नहीं है।

5. एनजेएसी में जिन 2 हस्तियों को शामिल किए जाने की बात कही गई थी, उनका चुनाव चीफ जस्टिस, प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता या विपक्ष का नेता नहीं होने की स्थिति में लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता वाली कमिटी करती। इसी पर सुप्रीम कोर्ट को सबसे ज्यादा ऐतराज था।

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