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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्राइवेट कर्मचारियों को मिल सकती है तिगुनी पेंशन, पर करना होगा यह काम

अभी तक EPFO द्वारा EPS में 15000 रुपए की सैलरी के आधार पर ही पेंशन की गणना की जा रही थी। इसमें ईपीएफओ का हिस्सा और नियोक्ता द्वारा दिया जा रहा 8.33% हिस्सा भी शामिल होता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक प्राइवेट कर्मचारियों को मिलेगी ज्यादा पेंशन।

सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल को दिए अपने एक फैसले से प्राइवेट कर्मचारियों को मिलने वाली पेंशन में बड़ी राहत दी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद प्राइवेट कर्मचारियों को मिलने वाली पेंशन में काफी उछाल आया है। बता दें कि केरल हाईकोर्ट ने साल 2014 में अपने एक फैसले में ईपीएफओ को निर्देश दिए थे कि वह कर्मचारियों को EPS (Employee Pension Scheme) के तहत दी जाने वाली पेंशन पूरी सैलरी के आधार पर दे। जबकि इससे पहले EPFO कर्मचारियों को अधिकतम 15000 रुपए की सैलरी की गणना के आधार पर पेंशन देता था। साथ ही केरल हाईकोर्ट ने ईपीएफओ के उस नियम को भी बदल दिया, जिसमें कर्मचारी की पिछले 5 सालों की औसत सैलरी के आधार पर पेंशन की गणना की जाती थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में रिटायरमेंट से पहले के आखिरी साल की सैलरी के आधार पर ही पेंशन देने के निर्देश दिए थे। अब 1 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने भी केरल हाईकोर्ट के इस फैसले का समर्थन किया और EPFO को कर्मचारियों की पूरी सैलरी और रिटायरमेंट से आखिरी साल की सैलरी के आधार पर पेंशन देने का निर्देश दिया।

ज्यादा पेंशन पाने के लिए करना होगा ये कामः सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कर्मचारियों को ज्यादा पेंशन मिलने का रास्ता तो साफ हो गया है। लेकिन इसके लिए कर्मचारियों को भी अपने ईपीएफ खाते से बड़ी रकम अपने ईपीएस खाते में ट्रांसफर करनी होगी। दरअसल अभी ये नियम है कि कर्मचारी के ईपीएफ खाते से एक निश्चित रकम कर्मचारी के ईपीएस खाते में डाली जाती है। जिसके बाद कर्मचारी द्वारा जितने साल नौकरी की गई और उसकी अंतिम सैलरी के आधार पर पेंशन की गणना की जाती है। पेंशन की गणना के लिए ईपीएफओ जिस फॉर्मूले का इस्तेमाल करता है, उसके मुताबिक कर्मचारी द्वारा नौकरी किए गए कुल सालों को अंतिम सैलरी के साथ गुणा किया जाता है और फिर प्राप्त संख्या को 70 से भाग कर दिया जाता है। इसके बाद जो राशि मिलती है, वहीं कर्मचारी की पेंशन होती है।

चूंकि अभी तक EPFO द्वारा EPS में 15000 रुपए की सैलरी के आधार पर ही पेंशन की गणना की जा रही थी। इसमें ईपीएफओ का हिस्सा और नियोक्ता द्वारा दिया जा रहा 8.33% हिस्सा भी शामिल होता है। अब यदि कर्मचारी को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ज्यादा पेंशन पानी है तो उसे अपने ईपीएफ खाते से बड़ा भाग ईपीएस खाते में ट्रांसफर कराना होगा, ताकि बीते सालों की भी पूर्ति की जा सके। उदाहरण के लिए यदि किसी कर्मचारी की सैलरी 10 हजार रुपए है और 20 सालों के दौरान हर साल 10% की बढ़ोत्तरी के बाद मौजूदा समय में उसकी सैलरी करीब 60 हजार हो जाती है। अब उसके ईपीएफ खाते में 4 लाख रुपए इकट्ठे होते हैं। ईपीएफ और नियोक्ता के हिस्से को मिलाकर यह राशि करीब 8 लाख रुपए हो जाएगी। ईपीएस के पुराने नियमों के मुताबिक कर्मचारी को इस पर करीब 4 हजार रुपए की पेंशन मिलेगी। लेकिन यदि कर्मचारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, ज्यादा पेंशन पाना चाहता है तो उसे अपने ईपीएस खाते में अपने फंड का बड़ा हिस्सा जमा कराना होगा, जिसके बाद उसकी पेंशन 300 प्रतिशत बढ़कर करीब 17 हजार रुपए हो सकेगी।

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