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रफाल सौदे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मामले के जांच की जरूरत नहीं, राहुल गांधी की माफी भी स्वीकार

दुनिया की कोई अन्य अदालत इस तरह के तर्कों पर रक्षा सौदे की जांच नहीं करेगी।

Author Updated: November 14, 2019 11:08 AM
पीठ ने कहा था कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट रफाल सौदे मामले में अपना फैसला सुना दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले की जांच की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में पीएम मोदी पर ‘चौकीदार चोर हैं’ वाले बयान को लेकर राहुल गांधी की तरफ से माफी को भी स्वीकार कर लिया है। अदालत ने रफाल मामले में पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया।

शीर्ष अदालत रफाल मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी, कार्यकर्ता व वकील प्रशांत भूषण समेत कुछ अन्य की तरफ से ये पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थीं। इनमें पिछले साल के 14 दिसंबर के उस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई थी जिसमें फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट से 36 लड़ाकू विमान खरीदने के केंद्र के रफाल सौदे को क्लीन चिट दी गई थी।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसफ के पीठ ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मामले पर 10 मई को सुनवाई पूरी की थी। पीठ ने कहा था कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा। शीर्ष अदालत ने 14 दिसंबर, 2018 को 58,000 करोड़ के इस समझौते में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जांच का मांग कर रही याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

सुनवाई पूरी करते हुए शीर्ष अदालत ने सौदे के संबंध में विभिन्न मुद्दों पर केंद्र से संप्रभु गारंटी से छूट और समझौते में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण उपबंध का नहीं होने आदि पर सवाल किए थे। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाले पीठ ने ललिता कुमारी मामले में फैसले का उल्लेख किया। इसमें कहा था कि संज्ञेय अपराध होने का खुलासा होने पर प्राथमिकी आवश्यक है। पीठ ने कहा था कि सवाल यह है कि आप ललिता कुमारी फैसले का पालन करने के लिए बाध्य हैं या नहीं।

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ से कहा था कि प्रथम दृष्टया एक मामला होना चाहिए अन्यथा वे (एजंसियां) आगे नहीं बढ़ सकती हैं। सूचना में संज्ञेय अपराध का खुलासा होना चाहिए। न्यायमूर्ति जोसेफ ने पहले के सौदे का हवाला दिया था और केंद्र से पूछा था कि रफाल पर फ्रांसीसी प्रशासन के साथ अंतर-सरकारी समझौते में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का उपबंध क्यों नहीं है।

विधि अधिकारी ने कहा कि अदालत इस तरह के तकनीकी पहलुओं पर फैसला नहीं कर सकती है। समझौते में संप्रभु गारंटी की छूट आदि से जुड़े सवाल पर वेणुगोपाल ने कहा था कि यह अभूतपूर्व कवायद नहीं है और रूस व अमेरिका के साथ ऐसे समझौतों का उल्लेख किया, जिसमें ऐसी छूट दी गई। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है।

दुनिया की कोई अन्य अदालत इस तरह के तर्कों पर रक्षा सौदे की जांच नहीं करेगी। पूर्व मंत्रियों और वकील भूषण ने केंद्र के जवाब के प्रत्युत्तर में यह हलफनामा दाखिल किया है। अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में कहा कि दिसंबर, 2018 के फैसले में शीर्ष अदालत के स्पष्ट निष्कर्ष में ऐसी कोई त्रुटि नहीं है जिसके लिए इस पर पुनर्विचार किया जाए।

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