आप किसी एक समुदाय को निशाना नहीं बना सकते, यूपीएससी जिहाद कार्यक्रम से जुड़ी सुनवाई पर बोले सुप्रीम कोर्ट; शो के प्रसारण पर लगाई रोक

कोर्ट ने कहा कि आप किसी एक समुदाय को निशाना नहीं बना सकते। 15 सितंबर को उच्च न्यायालय ने मुसलमानों के सिविल सेवा में चुने जाने को लेकर दिखाए जा रहे कार्यक्रम पर सख़्त एतराज़ जताते हुए बचे हुए एपिसोड दिखाने पर रोक लगा दी है।

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उच्च न्यायालय ने कार्यक्रम के बचे हुए एपिसोड दिखाने पर रोक लगा दी है।

सुप्रीम कोर्ट में सुदर्शन टीवी के यूपीएससी जिहाद कार्यक्रम को लेकर सुनवाई हो रही है। सुनवाई के दौरान इसपर कोर्ट ने कहा कि आप किसी एक समुदाय को निशाना नहीं बना सकते। वहीं 15 सितंबर को उच्च न्यायालय ने मुसलमानों के सिविल सेवा में चुने जाने को लेकर दिखाए जा रहे कार्यक्रम पर सख़्त एतराज़ जताते हुए बचे हुए एपिसोड दिखाने पर रोक लगा दी है।

अपना नचव करते हुए सुदर्शन न्यूज टीवी ने दावा किया कि नागरिकों और सरकार को राष्ट्रविरोधी और असामाजिक गतिविधियों के बारे में जागृत करना ने लिए यह इंवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म है। चैनल के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके ने अपनी ओर से जो हलफनामा प्रस्तुत किया है, उसमें कहा गया है कि वे किसी भी समुदाय या व्यक्ति के खिलाफ कोई दुर्भावना नहीं है। हलफनामे में कहा गया है कि चार एपिसोड जो प्रसारित किए गए हैं उनमें किसी भी विशेष समुदाय के खिलाफ कोई बयान या संदेश नहीं था कि उन्हें यूपीएससी में शामिल नहीं होना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि “यूपीएससी जेहाद” शब्दों का इस्तेमाल किया गया था, क्योंकि यह विभिन्न स्रोतों के माध्यम से उनके ज्ञान में आया है कि ज़कात फाउंडेशन को आतंक से जुड़े विभिन्न संगठनों से धन प्राप्त हुआ है।

सुरेश चव्हाणके ने कहा कि ऐसा नहीं है कि ज़कात फ़ाउंडेशन के सभी योगदानकर्ता आतंक से जुड़े हुए हैं। लेकिन कुछ योगदानकर्ता ऐसे संगठनों से जुड़े हैं जो चरमपंथी समूहों को फंड करते हैं। ज़कात फ़ाउंडेशन द्वारा प्राप्त धन IAS, IPS या UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों पर कर्च किया जाता है।

एपिसोड दिखाने पर रोक लगते हुए सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की खंडपीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इस चैनल की ओर से किए जा रहे दावे घातक हैं और इनसे यूपीएसी की परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर लांछन लग रहा है और ये देश का नुक़सान करता है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “एक ऐंकर आकर कहता है कि एक विशेष समुदाय यूपीएससी में घुसपैठ कर रहा है। क्या इससे ज़्यादा घातक कोई बात हो सकती है। ऐसे आरोपों से देश की स्थिरता पर असर पड़ता है और यूपीएससी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर लांछन लगता है।”

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