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खत्म नहीं हो रहा ऑक्सीजन संकट? सुप्रीम कोर्ट ने बनाई टास्क फोर्स, तैयार करेगी डिस्ट्रिब्यूशन का फॉर्मुला

कोर्ट ने कहा है कि टास्क फोर्स तुरंत काम करना शुरू करे और सरकार व सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपे। इस दल केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और अस्पताल यथोचित मदद प्रदान करेंगे।

भारत में कोरोना की दूसरी लहर के बीच मेडिकल ऑक्सीजन का संकट भी काफी गहराया है। अस्पताल बेहाल हैं और ऑक्सीजन के लिए उन्हें सरकारों के सामने हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। (फाइल फोटोः पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने ऑक्सीजन के सही, वैज्ञानिक ढंग से वितरण के लिए एक टास्क फोर्स बना दी। टास्क फोर्स में 12 सदस्य रखे गए हैं। उच्चतम न्यायालय के इस कदम से साफ है कि वह ऑक्सीजन को लेकर मौजूदा हालात से संतुष्ट नहीं है। टास्क फोर्स राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों को वैज्ञानिक आधार पर गैस वितरण के लिए प्रणाली विकसित करेगी। इसका कार्यकाल फिलहाल छह महीने रखा गया है।

टास्क फोर्स के सदस्यों में डॉ नरेश त्रेहान, डॉ भवतोष बिश्वास, डॉ जेवी पीटर, डॉ देवेंद्र राणा, डॉ देवी पी शेट्टी, डॉ गगनदीप कांग, डॉ राहुल पंडित, डॉ सौमित्र रावत, डॉ शिवकुमार सरीन, डॉ जरीर एफ उडवाडिया, स्वास्थ्य सचिव और कैबिनेट सचिव।

कोर्ट ने कहा है कि टास्क फोर्स तुरंत काम करना शुरू करे और सरकार व सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपे। इस दल केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और अस्पताल यथोचित मदद प्रदान करेंगे।

ऑक्सीजन वितरण पर टास्क फोर्स की नजर का अर्थ होगा कि गैस का समय से गंतव्य तक पहुंचना तथा इसके लिए जवाबदेही तय करेगी। इस दल का कार्यक्षेत्र पूरा देश होगा। वह हर राज्य के लिए स्मूद सप्लाइ सुनिश्चित करेगा।

टास्क फोर्स इस बात पर नजर रखेगी कि कहां पर सप्लाइ घट-बढ़ रही है। वह फिर इसी के मुताबिक संस्तुतियां देगी। कोर्ट ने कहा है कि जब तक टास्क फोर्स नए रिकमंडेशन नहीं देता, केंद्र सरकार मौजूदा व्यवस्था के अंतर्गत राज्यों को गैस का आवंटन करता रहेगा।

केंद्र ने इसके पहले कोर्ट से गुजारिश की थी कि वह जांच करवा कर विभिन्न राज्यों की ऑक्सीजन जरूरतों का पता करवाए।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा टास्क फोर्स गठित करने का काम समय हुआ है जब लगातार चौथे दिन दैनिक संक्रमण संख्या चार लाख से ऊपर जा रही है और मृतक संख्या भी चार हजार पार कर गई है।

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