पेगासस केस में केंद्र सरकार को झटका! जवाब न मिलने पर SC ने बना दी जांच कमेटी, CJI बोले- मूकदर्शक बन नहीं बैठ सकते हम

पेगासस जासूसी मामले में सर्वोच्च अदालत ने कहा कि विदेशी एजेंसियों द्वारा भारतीयों की जासूसी करने का मामला गंभीर चिंता का विषय है।

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पेगासस केस में सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है। (फोटो सोर्स: PTI)

पेगासस जासूसी मामले में स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि इस मामले में केंद्र द्वारा पेगासस को लेकर कोई विशेष खंडन नहीं किया गया। इस प्रकार हमारे पास याचिकाकर्ता की दलीलों को प्रथम दृष्टया स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, हम एक विशेषज्ञ समिति नियुक्त करते हैं जिसका कार्य सर्वोच्च न्यायालय द्वारा देखा जाएगा।

बता दें कि इससे पहले 23 सितंबर को चीफ जस्टिस ने ओपन कोर्ट में इस्राइल निर्मित पेगासस स्पाइवेयर से नागरिकों खासकर विपक्षी दल के नेताओं, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं आदि की जासूसी करने के आरोपों की जांच संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए एक तकनीकी समिति गठित करने के संकेत दिए थे। वहीं 27 अक्टूबर को इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है।

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि इस तीन सदस्यीय समिति की अध्यक्षता शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश आर वी रवींद्रन करेंगे और अन्य सदस्यों में आलोक जोशी और संदीप ओबेरॉय होंगे। बता दें कि इस कमेटी में साइबर सुरक्षा, फारेंसिक एक्सपर्ट, आईटी और तकनीकी विशेषज्ञों से जुड़े लोग होंगे।

उच्चतम न्यायालय ने विशेषज्ञों के पैनल से जल्द रिपोर्ट तैयार करने को कहा। साथ ही इस मामले में आगे की सुनवाई आठ सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध किया है।

पीठ ने कहा कि याचिकाओं में निजता के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उल्लंघन जैसे आरोप लगाए गए हैं, जिनकी जांच करने की जरूरत है।कोर्ट ने कहा कि नागरिकों की विवेकहीन जासूसी किसी भी दशा में मंजूर नहीं है। हम मूक दर्शक नहीं बन सकते। किसी की निजता का उल्लंघन नहीं होनी चाहिए। बता दें कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए मामले पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने से इनकार कर दिया था। इसको लेकर सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि पेगासस मामले में केंद्र सरकार की तरफ से कोई साफ स्टैंड नहीं था। ऐसे में निजता के उल्लंघन की जांच होनी चहिए।

इससे पहले पीठ ने केंद्र से जानना चाहा था कि इस मामले में क्या पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। जिसपर केंद्र ने कहा था कि यह सार्वजनिक रूप से चर्चा का विषय नहीं है। केंद्र सरकार ने इसे ”राष्ट्रीय सुरक्षा के हित’ के खिलाफ बताया था। बता दें कि एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया एसोसिएशन ने खबर दी थी कि पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए जासूसी की संभावित सूची में 300 से अधिक पुष्ट भारतीय मोबाइल फोन नंबर शामिल हैं।

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