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चीफ जस्टिस पर यौन उत्पीड़न के आरोप, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- खतरे में जुडिशरी की स्वतंत्रता

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता ‘बेहद गंभीर खतरे ’में है। वहीं, चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा, ''यह अविश्वसनीय है। मुझे नहीं लगता कि इन आरोपों का खंडन करने के लिए मुझे इतना नीचे उतरना चाहिए।

Author April 20, 2019 6:11 PM
देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई। (express photo)

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई पर उनके साथ काम करने वाली एक पूर्व महिला कर्मी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। महिला ने इस बारे में कई जजों को उनके आवास पर चिट्ठी भेजी है और आपबीती बताई है। इस मामले को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट में आज (शनिवार, 20 अप्रैल) अवकाश होने के बावजूद न केवल चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में तीन जजों की एक बेंच का गठन किया गया बल्कि उस पर सुनवाई भी हुई। इस बेंच का गठन उस वक्त किया गया, जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के संबंध में अधिकारियों को बताया। यह मामला न्यायपालिका की स्वतंत्रता से भी जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल संजीव सुधाकर कलगांवकर ने बताया कि महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोप दुर्भावनापूर्ण और निराधार हैं। उन्होंने कहा, ”इसमें कोई शक नहीं है कि ये दुर्भावनापूर्ण आरोप हैं लेकिन इस पर सुनवाई होगी।” उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि बहुत सारे जजों को एक महिला का लेटर मिला है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से एक नोटिस जारी किया गया जिसमें कहा गया कि एक विशेष बेंच का गठन किया गया है, जो सार्वजनिक महत्व के मुद्दे पर सुनवाई करेगी।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा, ”यह अविश्वसनीय है। मुझे नहीं लगता कि इन आरोपों का खंडन करने के लिए मुझे इतना नीचे उतरना चाहिए। आरोपों पर सीजेआई ने कहा, ”जज के तौर पर 20 साल की निस्वार्थ सेवा के बाद मेरा बैंक बैलेंस 6.80 लाख रुपये है। 20 साल की सेवा के बाद यह सीजेआई को मिला इनाम है। कोई मुझे पैसों के मामले में नहीं पकड़ सकता है, लोग कुछ ढूंढना चाहते हैं और उन्हें यह मिला।” गोगोई ने कहा, ‘इसके पीछे कोई बड़ी ताकत होगी, वे सीजेआई के दफ्तर को बेअसर करना चाहते हैं।”  वहीं सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता ‘बेहद गंभीर खतरे ’में है।

सीजेआई ने आगे कहा, ”मैं इस कुर्सी पर बैठूंगा और बिना किसी डर के न्यायपालिका से जुड़े अपने कर्तव्य पूरे करता रहूंगा। उन्होंने कहा, ”आज मैंने अदालत में बैठने का असामान्य और असाधारण कदम उठाया है क्योंकि चीजें बहुत आगे बढ़ चुकी हैं । न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता।” वहीं, खंडपीठ के दूसरे जज जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा, ” जुडिशल सिस्टम में लोगों के विश्वास को देखते हुए हम सभी जुडिशरी की स्वंतत्रता को लेकर चिंतित हैं। इस तरह के अनैतिक आरोपों से जुडिशरी पर से लोगों का विश्वास डगमगाएगा।”

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