ताज़ा खबर
 

सर्वोच्च अदालत ने ब्याज माफी पर मांगी नई योजना

कोेरोना महामारी के कारण हुई पूर्णबंदी को देखते हुए रिजर्व बैंक ने सभी कर्जदाताओं को कर्ज की किस्त छह महीने की अवधि के लिए स्थगित रखने की छूट दी थी। केंद्र और रिजर्व बैंक अदालत को बता चुके हैं कि कर्जदार चाहें तो अपने ऋण का पुनर्गठन कराकर किस्त भरने से दो साल तक की राहत ले सकते हैं।

banks loan write offएसबीआई ने जून तिमाही में राइट ऑफ किए 4,630 करोड़ रुपये के लोन

कर्जदारों को स्थगित किस्तों के ब्याज पर ब्याज से माफी देने के मामले में पेश की गई केंद्र की योजना को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असंतोषजनक बताते हुए नकार दिया। न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाले एक पीठ ने केंद्र को एक हफ्ते के भीतर नई योजना पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्तूबर को होगी। अदालत ने कहा कि केंद्र का हलफनामा याचिकाकतार्ओं द्वारा उठाए गए कई मुददों का समाधान करने में विफल रहा है। पीठ में न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी व न्यायमूूर्ति एमआर शाह भी थे।

पीठ ने पाया कि केंद्र का हलफनामा केवी कामथ समिति की 7 सितंबर की रपट में की गई सिफारिश के हिसाब से क्षेत्रवार कदम उठाए जाने के मामले में मौन है। इसमें अपनी ही नीति और निर्णयों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों का भी कोई जिक्र नहीं किया गया है। अदालत ने इसके लिए केंद्र और रिजर्व बैंक दोनों की खिंचाई की। रिजर्व बैंक के वकील वी गिरी ने जब अदालत को आश्वासन दिया कि ऐसा कर दिया जाएगा तो न्यायमूर्ति शाह बिगड़े-यह कब किया जाएगा। आप यही कहते आ रहे हैं कि यह हो जाएगा। लंबे समय से यही चल रहा है।

अदालत ने कहा कि केंद्र से रियल एस्टेट और बिजली उत्पादक कंपनियों की चिंता और सरोकार पर विचार करने के लिए कहा गया था। लेकिन इस मामले में केंद्र के निर्णयों को लागू करने के लिए सरकार या रिजर्व बैंक किसी की तरफ से भी कोई आदेश या परिपत्र जारी नहीं किया गया। मामले की सुनवाई अदालत को स्थगित करनी बाकी पेज 8 पर पड़ी क्योंकि रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े लोगों ने ब्याज पर ब्याज माफ करने की सरकार की योजना पर जवाब के लिए कुछ दिन की मोहलत मांगी।

केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि दो करोड़ रुपए तक के खास श्रेणी के कर्जदारों को किस्त स्थगन की छह माह की अवधि के चक्रवृद्धि ब्याज से सरकार माफी देने को तैयार है। इन श्रेणियों में छोटे व मंझले उद्यम, शिक्षा व आवासीय कर्ज और क्रेडिट कार्ड के बकाया की देनदारी आदि हैं। सरकार के हलफनामे पर रियल एस्टेट क्षेत्र के संगठन क्रेडाई की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इसमें कई तथ्य और आंकड़े किसी आधार के बिना ही दे दिए गए हैं।

क्रेडाई की तरफ से ही दूसरे वरिष्ठ वकील ए. सुंदरम ने पीठ को बताया कि सबके लिए चक्रवृद्धि ब्याज माफी करने से बैंकोें पर छह लाख करोड़ रुपए का बोझ पड़ने की बात खुद वित्त मंत्रालय का आकलन है। सरकार ने कहा कि चक्रवृद्धि ब्याज की माफी की जो योजना अदालत को दी गई है, वह पूर्व सीएजी राजीव महर्षि की अध्यक्षता वाले पैनल की सिफारिश पर आधारित है। जो पूर्व में चक्रवृद्धि ब्याज में किसी तरह की माफी न देने के सरकार के निर्णय के उलट है।

कोेरोना महामारी के कारण हुई पूर्णबंदी को देखते हुए रिजर्व बैंक ने सभी कर्जदाताओं को कर्ज की किस्त छह महीने की अवधि के लिए स्थगित रखने की छूट दी थी। केंद्र और रिजर्व बैंक अदालत को बता चुके हैं कि कर्जदार चाहें तो अपने ऋण का पुनर्गठन कराकर किस्त भरने से दो साल तक की राहत ले सकते हैं।

पीठ ने पाया कि केंद्र का हलफनामा केवी कामथ समिति की 7 सितंबर की रपट में की गई सिफारिश के हिसाब से क्षेत्रवार कदम उठाए जाने के मामले में मौन है। इसमें अपनी ही नीति और निर्णयों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों का भी कोई जिक्र नहीं किया गया है। अदालत ने इसके लिए केंद्र और रिजर्व बैंक दोनों की खिंचाई की।

Next Stories
1 सुशांत मामले में एम्स ने कहा- जानकारी सीबीआइ से लें, अस्पताल की रिपोर्ट पर विवाद
2 हाथरस कांड : यूपी सरकार की छवि बिगाड़ने का आरोप, जातीय हिंसा भड़काने की साजिश में 21 मामले दर्ज
3 शोध: मध्य हिमालयी क्षेत्र में विलुप्त हो गईं 25 फसलें
चुनावी चैलेंज
X