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छह राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, पूछा- गौ रक्षकों पर बैन क्यों ना लगा दिया जाए ?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूछा गया है कि जाति और धर्मों के प्रति असामंजस्य पैदा करने वाले ऐसे तत्वों पर बैन क्यों ना लगा दिया जाए ?

साल 2016 में गाय से जुड़ी हिंसा के 26 मामले दर्ज किए गए थे। (एक्सप्रेस फोटो)

 

राजस्थान के अलवर में कुछ कथित गौरक्षकों ने एक शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी। उस मामले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गौरक्षकों के प्रति सख्त रुख अपनाया। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (7 अप्रैल) को केंद्र और छह राज्यों को लिखकर जवाब मांगा है। इसमें पूछा गया है कि जाति और धर्मों के प्रति असामंजस्य पैदा करने वाले ऐसे तत्वों पर बैन क्यों ना लगा दिया जाए ? न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर ने राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश को नोटिस जारी किए और इस आरोप पर उनका रूख पूछा कि इन राज्यों में ‘‘जमीनी स्थिति’’ चिंताजनक है क्योंकि ये समूह हिंसा कर रहे हैं।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर ने राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश को नोटिस जारी किए और उन्हें तीन सप्ताह में अपना जवाब दायर करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश 55 साल के किसान पहलू खान की मौत के बाद दिया है। जिनकी कथित गौरक्षकों द्वारा पिटाई करने की वजह से मौत हुई थी। पहलू खान और उनके कुछ साथियों को अलवर हाईवे पर बुरी तरह पीटा गया था। उनके वाहनों में कुछ गाय मिली थीं। जिनको वह जयपुर से खरीदकर ला रहे थे। उन्होंने कागज भी दिखाए थे लेकिन कथित गौरक्षकों ने उनको फिर भी पीटा। जिसकी वजह से उनको काफी चोट लगी और हॉस्पिटल में उन्होंने दम तोड़ दिया।

गौरक्षकों के खिलाफ याचिका डालने वाले शख्स की तरफ से सीनियर वकील संजय हेगड़े पहुंचे थे। उन्होंने इस मामले की जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया। संजय ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकारों को कहा जाना चाहिए कि वे ऐसे संगठनों को सुरक्षा प्रदान ना करें। संजय ने यह भी आरोप लगाया कि गौ रक्षक दल से जुड़े लोग अवैध कामों से जुड़े होते हैं, हिंसा फैलाते हैं और दलितों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करते हैं।

 

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