ताज़ा खबर
 

रेप के आरोपी से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, क्या लड़की से शादी करना चाहते हो? गिरफ्तारी से दी सुरक्षा

एक नाबालिग लड़की से बलात्कार करने के आरोपी से सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया,"क्या आप पीड़िता से शादी करने के लिए तैयार हैं?"

SUPREME COURT, ALLAHABAD HC, YOGI GOVERNMENT, CORONA, CORONA LOCKDOWNसुप्रीम कोर्ट। (Indian Express)।

एक नाबालिग लड़की से बलात्कार करने के आरोपी से सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया,”क्या आप पीड़िता से शादी करने के लिए तैयार हैं?”लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि आरोपी पहले से ही शादीशुदा है तो अदालत ने आरोपी को संबंधित कोर्ट से नियमित जमानत लेने के लिए कहा। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ आरोपी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोपी महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड में एक तकनीशियन के रूप में काम करता है। उसने बॉम्बे हाइकोर्ट के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील की। हाइकोर्ट ने आरोपी की अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया था।

पीठ में जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यन भी शामिल थे। अदालत ने आरोपी से पूछा कि क्या आप पीड़िता से शादी करने के लिए तैयार हैं? यदि आप उससे शादी करने के इच्छुक हैं तो अग्रिम जमानत पर विचार कर सकते हैं, अन्यथा आप जेल जाएंगे। अदालत ने कहा कि “हम आपको शादी करने के लिए मजबूर नहीं कर रहे हैं।” इसके बाद आरोपी की ओर से पेश वकील ने कहा कि आरोपी शुरू में लड़की से शादी करने के लिए तैयार था, लेकिन पीड़िता ने मना कर दिया था और अब वह किसी और से शादी कर चुका है। आरोपी के वकील ने कहा कि आरोपी एक सरकारी कर्मी है। इस पर अदालत ने कहा, “आपको लड़की के साथ बलात्कार करने से पहले यह सोचना चाहिए था। आप जानते थे कि आप एक सरकारी कर्मचारी हैं।”

इस पर वकील ने कहा कि मामले में आरोप तय नहीं किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी से कहा,“आप नियमित जमानत के लिए आवेदन करें। हम गिरफ्तारी पर रोक लगाएंगे।” शीर्ष अदालत ने आरोपी को चार हफ्तों तक गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की।

शीर्ष अदालत बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ आरोपी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को पिछले साल जनवरी में दी गई अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया था। आरोपी पर POCSO कानून के तहत आरोप हैं।

शीर्ष अदालत में दायर अपनी याचिका में आरोपी ने महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन और अपील) नियम 1979 का उल्लेख किया और कहा कि अगर 48 घंटे की अवधि के लिए आपराधिक आरोपों के तहत किसी सरकारी कर्मचारी को पुलिस हिरासत में रखा जाता है, तो उसे सस्पेंशन के तहत रखा गया समझा जाएगा।

Next Stories
1 AAP नेता संजय सिंह बोले, लालकिला हिंसा की साजिश भाजपा ने की, तीनों कानून किसानों के डेथ वॉरंट
2 चीनी साइबर अटैक की वजह से मुंबई की बत्ती गुल, महाराष्ट्र मंत्री ने कहा- 3 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच
3 किसान आंदोलन: राकेश टिकैत का दावा- चुप्पी साधी सरकार किसानों पर एक्शन का बना रही है प्लान
ये पढ़ा क्या?
X