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कोर्टरूम में बोले जज- कहां थे आप? लेट कैसे हो गए? आपकी बस तो मिस हो गई!

सीबीआई के टॉप दो बड़े अधिकारियों के बीच जंग छिड़ गई थी। दोनों ने एक-दूसरे पर घूस लेने के आरोप लगाए हैं। इसके बाद केंद्र सरकार ने 23-24 अक्टूबर की मध्यरात्रि में दोनों बड़े अफसरों को जबरन छुट्टी पर भेज दिया था.

Author October 26, 2018 9:08 PM
सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना। (Photo: PTI)

सुप्रीम कोर्ट ने जबरन छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना से शुक्रवार (26 अक्टूबर) को पूछा कि आपने केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती देने में देर कैसे कर दी? कोर्ट ने कहा कि आपने तो बस मिस कर दी। दरअसल, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की खंडपीठ सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। वर्मा ने केंद्र सरकार द्वारा बुधवार (24 अक्टूबर) की रात 2.30 बजे जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। वर्मा की तरफ से सीनियर एडवोकेट फली नरीमन मामले की पैरवी कर रहे थे। उसी दौरान राकेश अस्थाना के वकील पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी पहुंचे। उन्होंने कोर्ट से कहा कि उन्होंने भी इसी मामले में याचिका दायर की है, तब कोर्ट ने टिप्पणी की, “आपने देर कैसे कर दी? आपने तो बस मिस कर दी। आपकी याचिका हमारे पास नहीं है।”

दरअसल, राकेश अस्थाना की तरफ से आज (शुक्रवार, 26 अक्टूबर) ही सुबह सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जब मीडियाकर्मियों ने मुकुल रोहतगी से पूछा कि अर्जी देने में देर क्यों हुई तो उन्होंने कहा, “यह मात्र एक और मामला है। इसमें वैसा कुछ भी बड़ा नहीं है और न ही उतना अहम है जितना मीडिया सोच रहा है।” बता दें कि राकेश अस्थाना ने आज सुबह ही मुकुल रोहतगी से मुलाकात की थी। उधर, आलोक वर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सीवीसी को निर्देश दिया कि दो हफ्तों के अंदर मामले की जांच पूरी की जाय। इसके अलावा जांच की निगरानी का जिम्मा रिटायर जज एके पटनायक को सौंपा है। कोर्ट ने अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव द्वारा नीतिगत फैसले लेने पर भी रोक लगा दी है और हर फैसले की सूचना कोर्ट को देने के निर्देश दिए हैं।

सीबीआई के टॉप दो बड़े अधिकारियों के बीच जंग छिड़ गई थी। दोनों ने एक-दूसरे पर घूस लेने के आरोप लगाए हैं। इसके बाद केंद्र सरकार ने 23-24 अक्टूबर की मध्यरात्रि में दोनों बड़े अफसरों को जबरन छुट्टी पर भेज दिया था और एम नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक नियुक्त कर दिया था। सीबीआई के इतिहास में यह पहला मामला है जब इस तरह से संस्था के दो बड़े अधिकारी आमने-सामने हुए हों।

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