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अब सुप्रीम कोर्ट में कागज के दोनों साइड ल‍िया जाएगा प्र‍िंट, दशकों पुरानी परंपरा बदलने का सर्कुलर जारी

पिछले साल साल अक्टूबर महीने में लॉ के तीन छात्रअभिनव सिंह, आकृति अग्रवाल और लक्ष्य पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी लिखकर अंग्रेजों के समय से चली आ रही प्रथा को खत्म करने की अपील की थी।

अब सुप्रीम कोर्ट में कागज के दोनों साइड प्र‍िंट ल‍िया जाएगा। (EXPRESS PHOTO BY PRAVEEN KHANNA)

अब सुप्रीम कोर्ट में स्टैंडर्ड ए4 साइज पेपर के दोनों साइड प्रिंट लिया जाएगा। यह कदम पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठाया गया है। वर्तमान में लीगल साइज पेपर का इस्तेमाल होता है और इसके एक साइड में ही प्रिंट किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी दशकों पुरानी परंपरा बदलने का सर्कुलर जारी कर दिया है।

सर्कुलर में कहा गया है, “सम्मानित सदस्यों को सूचित किया जाता है कि एससीबीए और एससीएओआरआई सदस्यों के साथ पेपर के उपयोग को लेकर न्यायधीशों की बैठक हुई। इसमें पर्यावरण की रक्षा के लिए ए4 स्टैंडर्ड आकार के कागज का उपयोग करने और दोनों साइड प्रिंट का फैसला किया गया। कैविएट दाखिल करने से संबंधित संशोधनों को सुधारने के लिए बार के अनुरोध को स्वीकार किया जाए।”

दरअसल पिछले साल साल अक्टूबर महीने में लॉ के तीन छात्रअभिनव सिंह, आकृति अग्रवाल और लक्ष्य पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी लिखकर अंग्रेजों के समय से चली आ रही प्रथा को खत्म करने की अपील की थी। उन्होंने पत्र में लिखा था कि ए4 साइज के कागज के इस्तेमाल किया जाना चाहिए। छात्रों ने यह भी कहा था इंग्लैंड और अमेरिका जैसे देशों में भी कानूनी प्रणाली में ए4 साइज के कागज का इस्तेमाल होता है।

एक अन्य फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में उम्रकैद की सजा पाए पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को अंतरिम जमानत देने से शुक्रवार को इनकार कर दिया और कहा कि वह गर्मियों की छुट्टियों में उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई करेगी।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने यह भी कहा कि वह सबरीमला संदर्भ मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद कुमार के स्वास्थ्य पर एम्स की चिकित्सा रिपोर्ट पर विचार करेगी। कुमार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने 17 दिसंबर 2018 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

जिस मामले में कुमार को दोषी ठहराया गया और सजा दी गई वह एक-दो नवंबर 1984 को दिल्ली छावनी के राज नगर पार्ट-1 इलाके में पांच सिखों की हत्या और राज नगर पार्ट-2 में एक गुरुद्वारे को जलाने से संबंधित है। गौरतलब है कि 31 अक्टूबर 1984 को दो सिख अंगरक्षकों द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे।

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