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दिवाली पर पटाखों को लेकर बोला SC, दिल्ली-NCR में सिर्फ चलाएं ईको-फ्रेंडली पटाखे

"हम साफ कर देना चाहते हैं कि हम सिर्फ दीवाली के लिए ही प्रतिबद्ध नहीं हैं। चाहे गुरुपर्व हो या क्रिसमस, हमारा आदेश सभी के लिए समान रूप से काम करेगा।”

Author October 31, 2018 2:35 PM
पटाखे फोड़ने की अनुमति सिर्फ रात में 8 से 10 बजे के बीच ही होगी। (फोटो सोर्स : Express Group)

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि इस त्योहारी मौसम में दिल्ली-एनसीआर में हरित पटाखों के अलावा अन्य कोई पटाखे नहीं बेचे जाएंगे। न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने कहा कि जिन पटाखों का निर्माण पहले से हो चुका है, उन्हें इस त्योहारी मौसम में देश के अन्य भागों में बेचा जा सकता है। पीठ ने कहा कि तमिलनाडु, पुडुचेरी और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों में त्योहार पर सुबह चार से पांच बजे के बीच और रात को नौ से दस बजे के बीच एक-एक घंटे के लिए पटाखे फोड़े जा सकेंगे।

शीर्ष अदालत ने अपने निर्देश में कहा कि सामुदायिक रूप से पटाखे फोड़ने के संबंध में उसका निर्देश पूरे देश में दो घंटे के लिए लागू होगा।
न्यायालय ने कहा कि ई-कॉमर्स वेबसाइटों (आॅनलाइन) के माध्यम से पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध पूरे देश में लागू है।

कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में साफ किया था कि त्योहारों जैसे दीवाली पर पटाखे फोड़ने की अनुमति सिर्फ रात में 8 से 10 बजे के बीच ही होगी। बेंच ने कहा कि क्रिसमस और नए साल की रात में पटाखे 23.45 बजे से लेकर 00.45 बजे तक ही चलाए जा सकते हैं। जस्टिस सीकरी ने कहा,” हम साफ कर देना चाहते हैं कि हम सिर्फ दीवाली के लिए ही प्रतिबद्ध नहीं हैं। चाहे गुरुपर्ब हो या क्रिसमस, हमारा आदेश सभी के लिए समान रूप से काम करेगा।”

कम उत्सर्जन वाले ‘‘हरित’’ पटाखों की बिक्री और निर्माण को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले का पर्यावरण और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्वागत किया था। कुछ ने इसे जहां ‘‘शानदार’’ निर्णय करार दिया वहीं दूसरों ने कहा कि समय आ गया है कि समाज ‘‘ज्यादा जवाबदेही’’ से धार्मिक उत्सवों को मनाए। पटाखों पर उच्चतम न्यायालय ने जहां पटाखों की ध्वनि तीव्रता की सीमा तय की जिसे देश भर के बाजारों में बेचा जाएगा वहीं इसने अपने फैसले में दिवाली और अन्य त्योहारों पर रात आठ बजे से दस बजे तक दो घंटे पटाखे जलाने का समय तय किया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के साथ काम कर चुके पर्यावरण वैज्ञानिक डी. साहा ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा था कि अधिकारियों को सुनिश्चित करना है कि नियमों का कड़ाई से पालन हो, खासकर पटाखा निर्माण के स्तर पर।

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