यूजीसी के नए रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब देने को भी कहा है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि ये प्रावधान पहली नजर में अस्पष्ट हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका भी है। यूजीसी के नए रेगुलेशन के खिलाफ कई लोगों ने याचिका दायर की थी। राहुल दीवान और संजय दीक्षित ने भी याचिका दायर की थी, जिस पर बहस विष्णु शंकर जैन ने की। इस याचिका को दो युवा वकीलों ने ड्राफ्ट किया था। एडवोकेट पार्थ यादव और एडवोकेट मणि मुंजाल ने याचिका को ड्राफ्ट किया था जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने इसकी समीक्षा की थी।
पार्थ यादव ने अपने सोशल मीडिया हैंडल X के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी हिंदू के साथ अन्याय होगा तो हम उसका निवारण करेंगे। पार्थ यादव ने लिखा, “आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने यूजीसी विनियम, 2026 के असंवैधानिक प्रावधानों को चुनौती देने वाली मेरी याचिका पर रोक लगा दी है। यह हिंदुत्व के लिए एक बड़ी जीत है। कई लोगों ने इस मुद्दे को सवर्ण या ब्राह्मण बनाम अन्य के रूप में चित्रित करने का प्रयास किया है। यह याचिका मैंने दायर की है और मैंने राहुल दीवान, संजय दीक्षित, रूबल पाडलिया और अनुभव का प्रतिनिधित्व किया है। हम सभी हिंदुत्व सेनानी हैं।”
पार्थ ने आगे कहा कि इस याचिका का ड्राफ्ट मैंने और मणि मुंजाल ने तैयार किया, पूज्य हरिशंकर जैन ने इसकी समीक्षा और अंतिम निर्णय किया और विष्णु शंकर जैन ने इस पर बहस की। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के प्रति यह एक शुद्ध सेवा है, जिसका स्पष्ट संदेश है – जाति के आधार पर किसी भी हिंदू के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा। पार्थ यादव ने कहा कि यह हमारे अपने लोगों की रक्षा के लिए एक शुद्ध और व्यापक हिंदू प्रयास है। जैसा कि वीर सावरकर कहते थे, हिंदू स्वयं में एक जाती है क्योंकि जाती का अर्थ Latin ‘casta/caste’ नहीं किंतु अंग्रेज़ी में ‘species’ है।
UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, समान अवसरों को लेकर भेदभाव का आरोप
पार्थ यादव ने आगे कहा, “हमारे प्रयास हिंदू अधिकारों की रक्षा के लिए हैं। जाति, क्षेत्र, भाषा और यहां तक कि राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना सभी हिंदू हमारे भाई-बहन हैं। दुनिया में कहीं भी किसी भी हिंदू को नुकसान पहुंचाने या अन्याय करने के प्रयास को रोकना और उसका निवारण करना हमारा कर्तव्य है। यह सदी और आने वाले 100 साल हिंदू पुनर्जागरण के हैं और हिंदू सभ्यता को पुनर्जीवित करने और उसे मजबूत बनाने तथा हमारी भारत माता की मुक्ति के हैं। धर्म की स्थापना की दिशा में। वे दिन बीत गए जब गैर-हिंदुओं ने हस्तक्षेप किया और हमें एक-दूसरे के खिलाफ भड़काया।”
पार्थ यादव ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों को आगे लिखा;
- मैंने छाती का लहू पिला पाले विदेश के क्षुधित लाल।
- मुझ को मानव में भेद नहीं, मेरा अंतस्थल वर विशाल।
- जग के ठुकराए लोगों को, लो मेरे घर का खुला द्वार।
- अपना सब कुछ लुटा चुका, फिर भी अक्षय है धनागार।
- हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय!
पढ़ें UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
