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मौलाना बोले- मस्जिद में नहीं घर पर नमाज पढ़ें महिलाएं, अदालत का दखल देना मंजूर नहीं

इस्लाम मे पुरुषों को मस्जिद में जाकर नमाज अदा करने का नियम है जो कि महिलाओं को प्रवेश से रोकता है।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

केरल के समस्‍त केरला जमीयतुल उलमा संगठन ने महिलाओं को घर पर ही नमाज पढ़ने की हिदायत दी है। सुन्नी विद्वानों और मौलवियों के इस प्रभावशाली संगठन ने महिलाओं के मस्जिद में नमाज अदा करने को जायज नहीं ठहराया है। संगठन के महासचिव मौलाना के अलीक्‍कूटी मुसलियर ने कहा है कि ‘धार्मिक मुद्दों पर कोर्ट की दखलअंदाजी को हम स्वीकार नहीं करते। हम सिर्फ अपने धार्मिक नेताओं के दिशा-निर्देशों को ही मानते हैं।’

एक रिपोर्टर से बातचीत में उन्होंने आगे कहा, ‘इस्लाम मे पुरुषों को मस्जिद में जाकर नमाज अदा करने का नियम है और यही नियम महिलाओं को प्रवेश से रोकता है। और यह नियम 1400 साल पुराना है जिसपर पैगम्बर मोहम्मद ने भी अपना स्पष्टीकरण साझा किया है। समस्‍त का इससे पहले केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर भी यही रुख था।’

वहीं सुन्नी नेता और अखिल भारतीय सुन्नी जामियाथुल उलमा के जनरल सेक्रटरी कांथापुरम एपी अबुबुकर मुसलियार ने कहा ‘कोर्ट को घार्मिक नेताओं से बातचीत के बाद ही धर्म से जुड़े मुद्दों को सुलझाना चाहिए। इस्लाम में महिलाओं को घर पर ही नमाज अदा करने के लिए घर को ही सबसे अच्छी जगह माना गया है। हां मक्का-मदीना मस्जिद में महिलाओं को प्रवेश दिया जाता है लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि इसका दायरा बढ़ाया जाए।’

बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने मस्जिदों में मुस्लिम महिलाओं को नमाज पढ़ने की इजाजत के लिये दायर याचिका पर मंगलवार को केंद्र को नोटिस जारी किया है। पुणे के एक मुस्लिम दपंति ने महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश की मांग को लेकर याचिका दायर की है जिसपर कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस एस ए बोबड़े की बेंच ने नोटिस जारी कर केंद्र से जवाब मांगा है।

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