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तमिलनाडु में प्रशांत किशोर को टक्कर दे रहे 2014 चुनाव में साथ काम कर चुके सुनील, PK डीएमके तो सुनील AIADMK को दे रहे सर्विस

सुनील PK के पुराने सहयोगी हैं। दोनों बीजेपी के लिए 2014 में रणनीति बनाने का काम शिद्दत से कर चुके हैं। लेकिन अभी के माहौल में दोनों एक दूसरे को मात देने का पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। दोनों के बीच तमिलनाडु में कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।

Tamil Nadu Electionडीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के साथ सीएम के. पलानीस्वामी (फोटो सोर्सः एजेंसी)

राजनीतिक गलियारों के लिए प्रशांत किशोर यानि PK का नाम अनजाना नहीं है। 2014 में पहली बार सुर्खी में आए प्रशांत के बारे में माना जाता है कि जिस राजनेता के साथ वह लग जाते हैं, उसे येन केन प्रकारेण जिताकर ही मानते हैं। उनकी रणनीति ऐसी होती है कि उसकी काट करना बेहद मुश्किल काम है। अलबत्ता, अब PK को अपने पुराने सहयोगी सुनील कनगोलू से टक्कर मिल रही है।

सुनील PK के पुराने सहयोगी हैं। दोनों बीजेपी के लिए 2014 में रणनीति बनाने का काम शिद्दत से कर चुके हैं। लेकिन अभी के माहौल में दोनों एक दूसरे को मात देने का पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। दोनों के बीच तमिलनाडु में कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। PK यहां DMK गठबंधन को सत्ता तक पहुंचाने की जुगत भिड़ा रहे हैं तो सुनील पूरी कोशिश में हैं कि किसी तरह से मौजूदा सीएम के. पलानीस्वामी की ऐसी छवि गढ़ी जाए जो दिवंगत जयललिता की परछाई से बाहर दिखे। यानि एक कद्दावर नेता की इमेज।

सुनील का इतिहास देखा जाए तो वह McKinsey के सलाहकार रह चुके हैं। 2016 के असेंबली चुनाव में वह DMK के साथ काम कर चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में वह स्टालिन के साथ थे। माना जाता है कि तब उनकी रणनीति की बदौलत DMK लोकसभा की 38 सीटें जीतने में कामयाब हुई थी। तमिलनाडु में लोकसभा की कुल 39 सीटें हैं। DMK की इस कामयाबी ने राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी।

उसके बाद सुनील बीजेपी के साथ जुड़ गए और असेंबली चुनाव के स्ट्रेटजी वार रूम Billion Minds के लिए काम करने लगे। सूत्रों का कहना है कि जब सुनील ने DMK का साथ छोड़कर AIADMK का दामन थामा तो स्टालिन ने प्रशांत किशोर का हाथ पकड़ लिया। अब PK स्टालिन की DMK की जीत के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं। उनका सुनील से बेहद कड़ा मुकाबला है।

सूत्रों का कहना है कि प्रशांत फिलहाल पूरी तरह से बंगाल पर फोकस कर रहे हैं। वहां की लड़ाई को वह खुद भी मुश्किल मान रहे हैं। तमिलनाडु में वह यदा-कदा ही दिखाई देते हैं। सुनील के लिए फायदे की स्थिति यह है कि वह सूबे की आबोहवा से वाकिफ हैं। उन्हें पता है कि तमिलनाडु में कौन सी चीजें असर दिखा सकती हैं। उन्होंने ही DMK के लिए (BY US,FOR US) का नारा गढ़ा था। इसके जरिए स्टालिन लोगों को लुभाने में कामयाब रहे थे।

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