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समर सोलस्टाइसः दिल्ली में 21 जून को दिन होगा 13 घंटे 58 मिनट का, जानिए क्यों

नासा के मुताबिक-नार्थ पोल पर इस दिन सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा 30 फीसदी ज्यादा होती है। उत्तरी गोलार्द्ध में 20, 21, 22 जून को सबसे ज्यादा ऊर्जा मिलती है जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध में 21, 22, 23 दिसंबर को सबसे ज्यादा ऊर्जा मिलती है। वहां तब इसे विंटर सोलस्टाइस कहा जाता है। तब वहां रात सबसे लंबी होती है।

समर सोलस्टाइसः 21 जून को दिन होगा 13 घंटे 58 मिनट का (फोटोः इंडियन एक्सप्रेस)

उत्तरी गोलार्द्ध में 21 जून सबसे लंबा दिन होगा। दिल्ली की बात की जाए तो उस दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर होगा जबकि सूर्यास्त 7 बजकर 21 मिनट पर। यानि दिन की कुल अवधि 13 घंटे 58 मिनट 1 सेकेंड की होगी। ये साल का सबसे लंबा दिन होगा। तकनीकी रूप से इस दिन को समर सोलस्टाइस कहते हैं।

जानकारी के मुताबिक साल के सबसे लंबे दिन को ग्रीष्मकालीन संक्रांति कहते हैं। इस साल ग्रीष्म संक्रांति 21 जून को सुबह 9 बजकर 2 मिनट में शुरू होगी। इसी दिन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाता है। ग्रीष्म संक्रांति के दिन सूर्य आसमान में अपने सबसे उच्चतम बिंदु पर पहुंच जाता है। इस वजह से दिन में ज्यादा उजाला रहता है और रात भी देरी से होती है। यह दिन साल का सबसे लंबा दिन भी होता है। ग्रीष्म संक्रांति को एस्टिवल सोलस्टाइस या मिडसमर के नाम से भी जानते हैं।

नासा के मुताबिक-नार्थ पोल पर इस दिन सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा 30 फीसदी ज्यादा होती है। उत्तरी गोलार्द्ध में 20, 21, 22 जून को सबसे ज्यादा ऊर्जा मिलती है जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध में 21, 22, 23 दिसंबर को सबसे ज्यादा ऊर्जा मिलती है। वहां तब इसे विंटर सोलस्टाइस कहा जाता है। तब वहां रात सबसे लंबी होती है।

उत्तरी गोलार्ध में ये सबसे बड़ा दिन होता है, क्योंकि सूर्य ठीक उत्तरी गोलार्ध के 23.5 डिग्री ऊपर रहता है। इस वजह से इसे ग्रीष्म संक्रांति कहते हैं। वहीं, दक्षिणी गोलार्ध में आज का दिन सबसे छोटा होता है। इस वजह से इसे शीतकालीन संक्रांति भी कहते हैं।

जून संक्रांति में सूर्य अपनी सबसे उत्तरी स्थिति में पहुंच जाता है। इस समय सूर्य कर्क रेखा पर स्थिर रहता है। इसके बाद अपनी दिशा उलट देता है और फिर से दक्षिण की ओर बढ़ना शुरू कर देता है। वहीं, दिसंबर संक्रांति के दौरान इसका ठीक उल्टा होता है। इस दौरान सूर्य आकाश में अपनी सबसे दक्षिणी स्थिति में पहुँच जाता है और मकर रेखा पर स्थिर हो जाता है। फिर उत्तर दिशा की तरफ बढ़ने लगता है।

इस दिन भले ही सूर्य हमारे सिर के ठीक ऊपर रहता है, पर यह दिन साल का सबसे गर्म दिन भी नहीं होता है। उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे गर्म दिन आमतौर पर संक्रांति के कुछ सप्ताह या कभी-कभी कुछ महीनों बाद आता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि महासागरों और भूभागों को गर्म होने में समय लगता है।

हालांकि, वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि 21 जून सबसे लंबा दिन तो होगा लेकिन ये जरूरी नहीं कि इसकी वजह से सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में बहुत ज्यादा तब्दीली हो जाएगी। ये निर्भर करेगा कि भारत की latitudinal location क्या होगी।

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