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Birthday Special: ‘तहलका’ मचाने वाले सुब्रमण्यन स्वामी ने तब अटल सरकार और गांधी परिवार के लिए खड़ी की थी मुश्किलें, इंदिरा से दुश्मनी यूं पड़ी थी भारी

आरबीआई के मौजूदा गवर्नर शक्तिकांत दास हों या फिर पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, सुब्रमण्यन स्वामी ने खुलकर दोनों की आलोचना की है। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ उनकी तनातनी जगजाहिर थी।

SUBRAMANIAN SWAMY Nraendra modi rss bjp indira gandhi atal bihariसुब्रमण्यन स्वामी की आलोचना से भाजपा और आरएसएस भी अछूती नहीं रही हैं। (रायटर्स/फाइल)

मशहूर अर्थशास्त्री, वकील और सांसद सुब्रनमण्यन स्वामी आज अपना 81वां जन्मदिन मना रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पत्र भेजकर सुब्रमण्यन स्वामी को जन्मदिन की बधाई दी है। जिसे स्वामी द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया गया है। भारतीय राजनीति में पिछले 4 दशकों से सक्रिय सुब्रमण्यन स्वामी की छवि एक ऐसे राजनेता की है, जो परोक्ष और सांकेतिक आलोचना में बिल्कुल यकीन नहीं रखते हैं और खुलकर अपने विरोधियों पर निशाना साधते हैं।

आरबीआई के मौजूदा गवर्नर शक्तिकांत दास हों या फिर पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, सुब्रमण्यन स्वामी ने खुलकर दोनों की आलोचना की है। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ उनकी तनातनी जगजाहिर थी। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला हो या फिर राहुल गांधी और सोनिया गांधी की नागरिकता का सवाल स्वामी ने इन मुद्दों पर कांग्रेस को जमकर घेरा है। साल 1974 में जनसंघ द्वारा स्वामी को राज्यसभा भेजा गया और उसके बाद से ही उनका जुड़ाव पहले जनसंघ और फिर भाजपा से हो गया।

सुब्रमण्यन स्वामी का राजनैतिक करियर गढ़ने में आरएसएस का अहम योगदान रहा लेकिन कई मुद्दों पर आरएसएस की आलोचना करने से भी स्वामी नहीं हिचकिचाए।

इंदिरा गांधी का विरोध करना पड़ा था भारीः सुब्रमण्यन स्वामी मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था के समर्थक रहे हैं, जो कि तत्कालीन इंदिरा गांधी को बहुत अधिक स्वीकार्य नहीं थे। अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले सुब्रमणयन स्वामी साल 1970 में इंदिरा गांधी की नजर में आए थे। देश की राजनीति पर उनकी पकड़ काफी मजबूत थी। स्वामी के खुली अर्थव्यवस्था के विचारों को इंदिरा गांधी ने खारिज कर दिया था, जिस पर स्वामी ने अपने बयानों में इंदिरा गांधी सरकार की आलोचना कर डाली थी।

बताया जाता है कि इस बात से इंदिरा गांधी इतनी नाराज हुई थीं कि दिसंबर 1972 में उन्हें आईआईटी दिल्ली की नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। इस बर्खास्तगी के खिलाफ स्वामी कोर्ट गए और केस जीते भी। अपनी बात को साबित करने के लिए स्वामी एक दिन के लिए आईआईटी की नौकरी पर गए और फिर अगले दिन इस्तीफा दे दिया।

साल 1999 में उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार को गिराने की भी कोशिश की थी। इसके लिए उन्होंने जयललिता और सोनिया गांधी की दिल्ली के अशोक होटल में मुलाकात भी करायी थी। हालांकि उनकी ये कोशिश नाकाम हो गई थी। बताया जाता है कि इसके बाद से ही वह सोनिया गांधी के खिलाफ खासे आक्रामक नजर आए।

आप सुब्रमण्यन स्वामी के बारे में ये अहम बाते नहीं जानते होंगेः सुब्रमण्यन स्वामी के पिता एक मशहूर गणितज्ञ सीताराम सुब्रमण्यन थे, जो कि भारतीय सांख्यिकी संस्थान के निदेशक भी रहे। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद सुब्रमण्यन स्वामी ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) कोलकाता में प्रवेश लिया था।

आईएसआई के तत्कालीन निदेशक पीसी महालानोबीस थे। कहा जाता है कि महालानोबीस और सुब्रमण्यन स्वामी के पिता के बीच प्रतिद्वंदिता थी। महालानोबीस को जब सुब्रमण्यन स्वामी के बारे में पता चला तो उन्हें खराब ग्रेड मिलने लगे। इस पर स्वामी ने महालानोबीस के प्रसिद्ध विश्लेषण सिद्धांत को एक पुराने समीकरण की नकल सिद्ध कर दिया था। इससे स्वामी को देशभर में काफी पहचान मिली थी।

15 सितंबर 1939 को पैदा होने वाले सुब्रमण्यन स्वामी ने महज 24 साल की उम्र में अपनी प्रतिभा के दम पर हावर्ड से पीएचडी की डिग्री हासिल कर ली थी और 27 की उम्र में हावर्ड में पढ़ाने भी लगे थे।

स्वामी मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था के पक्षधर रहे हैं। उनकी प्रतिभा को देखते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने उन्हें दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया था। उनके बाजार हितैषी विचार मनमोहन सिंह के प्रसिद्ध 1991 के बजट से काफी पहले ही लोकप्रिय हो गए थे।

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