ताज़ा खबर
 

सावरकर ने भगत सिंह के लिए नहीं कहे थे एक भी शब्द, पर नेहरू, गांधी और नेताजी ने की थी बचाने की कोशिश

चमन लाल ने अपनी किताब में भी लिखा है कि भगत सिंह भी नेहरू के समाजवाद से काफी प्रभावित थे। लाल ने महात्मा गांधी के बारे में भी लिखा है कि उन्होंने भी भगत सिंह को बचाने की कोशिश की थी लेकिन जितने प्रयास नेहरू और सुभाष चंद्र बोस ने किए उतने गांधी ने नहीं किए थे।

शहीद भगत सिंह और विनायक दामोदर सावरकर। फोटो: PTI/जनसत्ता

शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 112वीं जयंती के मौके पर भगत सिंह अभिलेखागार व संसाधन केंद्र दिल्ली के मानद सलाहकार और भगत सिंह के दस्तावेजों के संपादक प्रो चमन लाल का कहना है कि तत्कालीन स्वतंत्रता सेनानियों में से बहुत कम ने भगत सिंह को अंग्रेजी दास्ता और जुल्म से छुटकारा दिलाने के लिए संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व के जनक कहे जाने वाले विनायक दामोदर सावरकर ने क्रांतिकारी भगत सिंह की शहादत पर उनके पक्ष में एक शब्द तक नहीं कहा।

नेशनल हेराल्ड की एक खबर के मुताबिक, ‘यह ऐतिहासिक तथ्य है कि तथाकथित धार्मिक संगठन या धर्म की राजनीति करने वाले राजनीतिक संगठनों में से किसी ने भी शहीद भगत सिंह के लिए एक शब्द भी नहीं कहा।’ हालांकि, चमल लाल का मानना है कि केवल कांग्रेसी और वामदलों के नेताओं ने ही भगत सिंह को दी गई सजा के प्रति आक्रोश का इजहार किया था।

बतौर चमन लाल, जवाहर लाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस ने तब भगत सिंह को छुड़ाने की भी कोशिश की थी लेकिन वो नाकाम रहे। चमन लाल के मुताबिक पेरियार ने भगत सिंह पर न केवल तमिल जर्नल कुदई अरासु में संपादकीय लिखा था बल्कि उनकी किताब ‘मैं नास्तिक क्यों हूं’ का तमिल में अनुवाद भी किया था, जो 1934 में प्रकाशित हुई थी।

चमन लाल ने अपनी किताब में भी लिखा है कि भगत सिंह भी नेहरू के समाजवाद से काफी प्रभावित थे। लाल ने महात्मा गांधी के बारे में भी लिखा है कि उन्होंने भी भगत सिंह को बचाने की कोशिश की थी लेकिन जितने प्रयास नेहरू और सुभाष चंद्र बोस ने किए उतने गांधी ने नहीं किए थे। गांधी जी ने वायसराय को कई बार भगत सिंह को बचाने के लिए चिट्ठी लिखी थी। भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को फांसी दिए जाने के तीन दिन बाद हुए कराची अधिवेशन में गांधी जी ने उन पर उठाए गए सभी सवालों के जवाब दिए थे।

ऐतिहासिक साक्ष्यों के मुताबिक 31 जनवरी 1931 को महात्मा गांधी ने इलाहाबाद में कहा था कि जिसे मृत्यु दंड दिया गया है उन्हें फांसी नहीं दी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा था, “मेरा व्यक्तिगत धर्म यह कहता है कि उन्हें जेल में भी नहीं रखना चाहिए था।” इसके बाद गांधी जी ने 18 फरवरी 1931 को वायसराय के सामने भगत सिंह का मुद्दा उठाया था और कहा था कि भगत सिंह की फांसी रोक देनी चाहिए।

मशहूर लेखक भारत डोगरा ने भी लिखा है कि गंभीर बीमारी के बावजूद जवाहर लाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरु भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी दोस्तों से मिलने अदालत में गए थे और वहां से लौटकर कानूनी सलाह उपलब्ध करवाने और क्रांतिकारियों की रिहाई के लिए अभियान भी चलाया था। बतौर डोगरा, यह रिकार्ड पर है कि चंद्रशेखर आजाद को भी गुपचुप वित्तीय सहायता मोतीलाल नेहरु ने पहुंचाई थी।

बता दें कि पिछले साल 2018 के मई में कर्नाटक विधान सभा चुनावों के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस के किसी नेता ने भी भगत सिंह से जेल में मुलाकात नहीं की थी। हालांकि, तुरंत मीडिया में इस बात की चर्चा होने लगी कि 8 अगस्त, 1929 को जवाहर लाल नेहरू ने भगत सिंह और उनके साथियों से जेल में मुलाकात की थी। इसका उल्लेख ऐतिहासिक दस्तावेजों में भी है। दरअसल, जवाहर लाल नेहरू आरएसएस, बीजेपी और हिन्दूवादी संगठनों के निशाने पर रहे हैं और लगभग हरेक बात पर भाजपा नेता नेहरू को दोष देते रहे हैं।

Next Stories
1 IRCTC Indian Railways: बिहार में बारिश ने मचाई ऐसी तबाही, रोड- रेल सेवा हो गई ठप, रेलवे ने रद्द की कई ट्रेनें, देखें पूरी लिस्ट
2 UN में इमरान खान की धमकी का अल्लाह के नाम पर समर्थन कर रहे थे पाक पत्रकार, बीजेपी के मुस्लिम प्रवक्ता ने इस्लाम बता कर दी बोलती बंद
3 योगी आदित्यनाथ पर ओवैसी का तंज- बिना पढ़े न करें कमेंट, पढ़ लें तीन किताब- जहांगीर, औरंगजेब के समय भी होता था निर्यात
आज का राशिफल
X