दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (IIT) के छात्रों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। छात्र दिल्ली के लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स के पास इकट्ठा हुए। करीब 300 छात्र संस्थान की मेन बिल्डिंग की पहली मंज़िल की लॉबी में और डायरेक्टर के ऑफिस के बाहर प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रहे थे। IIT के कैंपस के लिए छात्रों का विरोध प्रदर्शन एक असामान्य नजारा है लेकिन उनकी भीड़ चौंकाने वाली थी।
यह विरोध प्रदर्शन 31 साल के MSc फ़िज़िक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार के कैंपस की एक बिल्डिंग की छठी मंज़िल से कूदने के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने के दो दिन बाद हुआ। छात्रों ने कहा कि उसकी मौत 2023 के बाद से संस्थान में आठवीं आत्महत्या थी। छात्रों ने डीन और एसोसिएट डीन के इस्तीफे के साथ-साथ एक स्वतंत्र जांच और मृतक के परिवार के लिए मुआवज़े की मांग की।
8 लोगों की मौत के बाद इकठ्ठा हुए हैं- छात्र
एक छात्र ने कहा, “हम एक आत्महत्या के बाद यहां नहीं हैं। दो के बाद नहीं। हम आठ के बाद यहां हैं। यह उनके लिए काफी कैसे नहीं है?” छात्रों का प्रदर्शन लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स के बाहर हुआ, जहां छात्र इकट्ठा हुए और अपनी मांगों पर चर्चा की।
छात्रों की मांगों में छात्र वेलफेयर की एसोसिएट डीन प्रोफेसर श्रीदेवी उपाध्याय का इस्तीफा, मौतों की जांच और ऋषिकेश के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देना शामिल था।
ऋषिकेश की याद में थोड़ी देर की चुप्पी के बाद छात्रों ने उस बारे में बात करना शुरू किया जिसे उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही का एक पैटर्न बताया। एक छात्र ने कहा, “ऋषिकेश ने इस साल की शुरुआत में अपने पिता की मौत के बाद मेंटल हेल्थ की दिक्कतों की वजह से एक सेमेस्टर लंबा ब्रेक ले लिया था। उसका एक महीने से ज़्यादा समय तक इलाज चला।”
हॉस्टल से कट गया था नाम
एक और छात्र ने कहा, “हालांकि, जब वह जुलाई के आखिर में हॉस्टल लौटा, तो ब्रेक की वजह से उसका नाम हॉस्टल रोल से हटा दिया गया था।” छात्रों ने आरोप लगाया कि जिस हॉस्पिटल में उसका इलाज हुआ था, वहां से फिटनेस क्लीयरेंस मिलने के बावजूद ऋषिकेश को कमरा देने से पहले IIT दिल्ली हॉस्पिटल से एक और क्लीयरेंस लेने के लिए कहा गया। एक छात्र ने कहा, “आखिरकार उसे अपनी मां के साथ कैंपस के बाहर किराए के घर में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।”
एक और छात्र ने प्रदर्शन करते हुए कहा, “जब भी हम प्रॉब्लम के बारे में बात करने की कोशिश करते हैं, तो वे हमसे कहते हैं, अगर तुम नहीं संभाल सकते तो तुम्हें चले जाना चाहिए। उनमें हमदर्दी की कमी है।” प्रदर्शन के ज़ोर पकड़ने पर प्रशासन ने सोमवार को सभी क्लास कैंसिल कर दीं। शाम 5 बजे तक IIT दिल्ली के डायरेक्टर रंगन बनर्जी के ऑफिस के बाहर फर्स्ट-फ्लोर की लॉबी प्रदर्शन का केंद्र बन गई थी। वहां करीब 300 छात्र जमा हो गए थे। रंगन बनर्जी को छात्रों की डिमांड की लिस्ट पहले ही मिल चुकी थी और वह प्रोफेसर श्रीदेवी के साथ प्रतिनिधि से मिल रहे थे।
IIT दिल्ली के डायरेक्टर ने क्या कहा?
शाम करीब 5:30 बजे रंगन बनर्जी अपने ऑफिस से बाहर निकले। छात्रों ने खुशी मनाई। उन्होंने घोषणा की कि एक जांच कमिटी बनाई जाएगी। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि प्रोफेसर श्रीदेवी इस्तीफा नहीं देंगी। खुशी का शोर जल्द ही हूटिंग में बदल गया। प्रोफेसर श्रीदेवी को बिल्डिंग के पिछले एंट्रेंस से बाहर ले जाया गया। एक छात्र ने पूछा, “अगर वह हमारा सामना नहीं कर सकतीं, तो वह हमारी प्रॉब्लम कैसे सॉल्व करेंगी?”
एक और छात्र ने कहा, “अगर हमारा कोई क्रेडिट जाता है, तो हमें सज़ा मिलती है। उन्हें सज़ा क्यों नहीं मिल रही है? अगर हम उससे बात करने में सेफ़ महसूस नहीं करते, तो उसके उस कुर्सी पर बैठने का क्या मतलब है?” मुआवज़े के सवाल पर रंगन बनर्जी ने कहा कि ऋषिकेश के सभी मेडिकल खर्चों के साथ 6 लाख रुपये उसकी सिंगल मदर को दिए जाएंगे।
इस घोषणा से भीड़ को ज़्यादा तसल्ली नहीं मिली। एक छात्र ने कहा, “एक सिंगल मदर इससे क्या करे? वे वैसे भी पैसे की तंगी से जूझ रहे थे।” शुरुआती पुलिस जांच के मुताबिक, ऋषिकेश शनिवार सुबह करीब 8 बजे मेन गेट से IIT दिल्ली कैंपस में घुसा था। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा कि फिर वह लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स गया और छठी मंज़िल पर जाने के लिए लिफ्ट ली, फिर कहा जा रहा है कि उसने बिल्डिंग के सामने वाले हिस्से से छलांग लगा दी। उसकी मौत इस साल संस्थान में दूसरी कथित आत्महत्या थी। मार्च में एक 19 साल का BTech छात्र कैंपस में अपने अपार्टमेंट के अंदर मरा हुआ मिला था।
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