ताज़ा खबर
 

हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद तीनों छात्र जेल से रिहा, 1 साल से थे बंद

स्टूडेंट एक्टिविस्ट नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और आसिफ इकबाल तन्हा गुरुवार को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिए गए।

तीनों स्टूडेंट एक्टिविस्ट को रिहा कर दिया गया है।

स्टूडेंट एक्टिविस्ट नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और आसिफ इकबाल तन्हा गुरुवार को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिए गए। इससे कुछ घंटे पहले एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश मामले में तुरंत उनकी रिहाई का आदेश दिया था। इससे दो दिन पहले, दिल्ली हाई कोर्ट ने यूएपीए के तहत पिछले साल मई में गिरफ्तार नरवाल, कालिता और तन्हा को जमानत दे दी थी। जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अदालत का आदेश मिलने के बाद कालिता,नरवाल और आसिफ इकबाल तन्हा को रिहा कर दिया गया।

तीनों छात्र नेताओं के पते और मुचलके के सत्यापन में देरी के कारण जेल से उनकी रिहाई में देरी हो रही थी। दिल्ली हाई कोर्ट को गुरुवार को सूचित किया गया कि निचली अदालत ने जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्राओं देवांगना कालिता और नताशा नरवाल को जेल से तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है जिन्हें उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों से जुड़े मामले में 15 जून को जमानत दी गई थी।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने इस पर कहा, ‘‘यह शानदार है।’’ पीठ ने कहा कि आगे और किसी आदेश की जरूरत नहीं है तथा इसने तीनों छात्रों की याचिकाओं का निपटारा कर दिया जिन्होंने जेल से तत्काल रिहाई का आग्रह किया था और कहा था कि जमानत आदेश के 36 घंटे बाद भी उन्हें रिहा नहीं किया गया है।

हाई कोर्ट को आरोपियों के वकील ने सूचित किया कि निचली अदालत ने आज दिन में उनकी अंतरिम रिहाई का आदेश पारित किया जो दस्तावेजों और पते के सत्यापन का विषय है, और रिहाई वारंट इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जेल अधीक्षक को भेज दिए गए हैं।

हाई कोर्ट ने सुबह के अपने आदेश में निचली अदालत से आरोपियों की रिहाई के मामले पर ‘‘तत्परता’’ से गौर करने को कहा था। पीठ ने आरोपियों के वकील और दिल्ली पुलिस से संयुक्त रूप से दोपहर में निचली अदालत के समक्ष रिहाई का मामला रखने को कहा था। इसके बाद, निचली अदालत ने आरोपियों को हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप जेल से तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।

तन्हा के वकील ने निचली अदालत में शपथपत्र दायर किया कि उनका मुवक्किल दिल्ली नहीं छोड़ेगा। हाई कोर्ट ने कहा, ‘‘जब निचली अदालत ने एक बार जेल अधीक्षक को रिहाई का आदेश जारी कर दिया है तो मामला खत्म हो गया। अब और कुछ किए जाने की जरूरत नहीं है। आज का हमारा पहला कदम आपकी रिहाई है।’’

सुनवाई के दौरान तन्हा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि हाई कोर्ट ने चार जून के अपने आदेश में, जिसमें उनके मुवक्किल को परीक्षा में बैठने के लिए हिरासत में अंतरिम जमानत मिली थी, शर्त रखी थी कि अंतरिम जमानत खत्म होने पर छात्र को अपना लैपटॉप फॉरेंसिक ऑडिट के लिए पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ के पास जमा करना होगा। उन्होंने कहा कि वह लैपटॉप जमा करने को तैयार है लेकिन यह शर्त उसकी रिहाई को नहीं रोकेगी।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने कहा कि आरोपियों को नियमित जमानत मिलने के मद्देनजर राज्य और फॉरेंसिक ऑडिट नहीं करना चाहता। कोर्ट ने यह भी कहा कि क्योंकि वह 15 जून के अपने आदेश में पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इस आदेश के बाद चार जून का अंतरिम हिरासत जमानत का आदेश प्रभावी नहीं रह गया है, इसलिए अन्य किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है।

इन छात्रों को पिछले साल फरवरी में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़े मामले में यूएपीए के तहत मई 2020 में गिरफ्तार किया गया था। इन्हें उनके पते और जमानतदारों से जुड़ी जानकारी पूर्ण न होने का हवाला देते हुए समय पर जेल से रिहा नहीं किया गया था।

दिल्ली पुलिस ने 16 जून को आरोपियों को जमानत पर रिहा करने से पहले उनके पते, जमानतदारों तथा आधार कार्ड के सत्यापन के लिए अदालत से और समय मांगा था। पुलिस के इस आवेदन को खारिज करते हुए जज ने उन्हें दिल्ली में आरोपियों के पते को सत्यापित करने और गुरुवार शाम तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। वहीं, अन्य राज्य में उनके पते के सत्यापन पर अदालत ने उन्हें 23 जून को रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

इसके अलावा, अदालत ने हाई कोर्ट की उस टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें उसने कहा था कि एक बार जब कैद में रखे गए लोगों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया है और मुचलके के साथ जमानतदारों को प्रस्तुत किया गया है, तो उन्हें ‘‘एक मिनट के लिए भी’’ सलाखों के पीछे नहीं रहना चाहिए।

जज ने कहा, ‘‘ यह देखा गया कि राज्य को न्यूनतम संभव समय के भीतर इस तरह की सत्यापन प्रक्रिया के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को सुनिश्चित करना चाहिए और ऐसा कोई कारण नहीं हो सकता है, जो ऐसे व्यक्ति को उसकी स्वतंत्रता से वंचित करने के लिए पर्याप्त हो।’’

हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद कार्यकर्ताओं ने तत्काल जेल से रिहाई के लिए अदालत का रुख किया था, जिसने मामले पर बुधवार को अपना आदेश गुरुवार तक के लिए टाल दिया था।

Next Stories
1 सेना भवन विवाद पर राउत का बीजेपी को जवाब, कहा- हां हम सर्टिफाइड गुंडे
2 भाजपा ने 130 करोड़ लोगों की आस्था बेच दी, बोले कांग्रेस प्रवक्ता, संबित पात्रा बोले- सास बहू साजिश का डायलॉग
3 अब भाजपा के साथ नहीं बनेगी शिवसेना की बात? सामना में आगे के चुनाव NCP, कांग्रेस संग लड़ने का ऐलान
आज का राशिफल
X